ओडिशा में माओवादियों का खतरा नहीं, समयसीमा समाप्त होने के साथ ही आत्मसमर्पण का समय भी समाप्त: पुलिस
ओडिशा में माओवादियों का खतरा नहीं, समयसीमा समाप्त होने के साथ ही आत्मसमर्पण का समय भी समाप्त: पुलिस
भुवनेश्वर, 31 मार्च (भाषा) ओडिशा पुलिस ने मंगलवार को बताया कि राज्य में वामपंथी उग्रवाद से अब कोई खतरा नहीं है और शेष माओवादियों के आत्मसमर्पण की समय सीमा 31 मार्च को समाप्त हो गई है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (नक्सल विरोधी अभियान) संजीव पांडा ने बताया कि कंधमाल जिले में केवल कुछ ही माओवादी सक्रिय हैं और सुरक्षा बल अब उन्हें खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
उन्होंने पत्रकारों को बताया, “कंधमाल जिले में लगभग आठ . नौ माओवादी बचे हैं। आत्मसमर्पण की समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद, हम उन्हें पूरी तरह से पकड़ने और उन्हें खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।”
पांडा की यह टिप्पणी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा देश को नक्सली हिंसा से मुक्त घोषित करने के एक दिन बाद आई है।
उन्होंने बताया कि 31 मार्च तक उग्रवादी आंदोलन को समाप्त करने का मिशन चुनौतीपूर्ण था लेकिन सुरक्षा बलों, राज्य सरकार और जनता के समन्वित प्रयासों से इसे हासिल किया गया।
पांडा ने बताया कि 2025 की शुरुआत में नौ जिले माओवादी गतिविधियों से प्रभावित थे लेकिन अब उनकी उपस्थिति कंधमाल के एक छोटे से हिस्से तक ही सीमित है।
उन्होंने बताया कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में राज्य में विभिन्न बलों के 239 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं।
शहीदों में ओडिशा पुलिस के 142 कर्मी, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 25 जवान, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के 15 जवान, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 10 कर्मी, आंध्र प्रदेश पुलिस के 38 कर्मी और छत्तीसगढ़ पुलिस के नौ कर्मी शामिल हैं।
अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने 2025 और 2026 में दो केंद्रीय समिति सदस्यों सहित 27 माओवादियों को मार गिराया, नौ को गिरफ्तार किया और 120 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया।
भाषा जितेंद्र नरेश
नरेश

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