नोएडा हिंसा : उच्चतम न्यायालय का गिरफ्तार छात्रा को जमानत देने से इनकार, उच्च न्यायालय जाने कहा
नोएडा हिंसा : उच्चतम न्यायालय का गिरफ्तार छात्रा को जमानत देने से इनकार, उच्च न्यायालय जाने कहा
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने नोएडा में 13 अप्रैल को औद्योगिक श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने की आरोपी एक छात्रा को शुक्रवार को जमानत देने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने आकृति चौधरी की ओर से पेश वकील से इलाहाबाद उच्च न्यायालय जाने को कहा।
पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘आप उच्च न्यायालय क्यों नहीं जाते? हर कोई संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर कर यहां आ जाता है। उच्चतम न्यायालय में 93,000 मामले लंबित हैं।’’
चौधरी की ओर से पेश वकील ने उनकी मुवक्किल को जमानत दिए जाने का अनुरोध करते हुए कहा कि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए।
उन्होंने शीर्ष अदालत को बताया कि चौधरी दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा है।
उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों द्वारा प्रताड़ना का आरोप लगाने वाले केशव आनंद की याचिका पर पुलिस अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया।
नोएडा की एक अदालत ने इससे पहले औद्योगिक श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने की आरोपी तीन महिलाओं-चौधरी, मनीषा चौहान और सृष्टि गुप्ता-की सशर्त पुलिस हिरासत की अनुमति दी थी।
अदालत ने जांच कार्यवाही के दौरान उनके वकीलों को मौजूद रहने की भी अनुमति दी थी।
चौधरी और गुप्ता दोनों दिल्ली की रहने वाली हैं और उनकी उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच है। चौधरी ने दौलत राम कॉलेज से इतिहास में परास्नातक किया है जबकि चौहान नोएडा की एक औद्योगिक इकाई में काम करती है।
पुलिस ने हिरासत के लिए दायर अर्जी में कहा था, ‘‘आरोपियों के निवास स्थान से महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने की पूरी संभावना है।’’
वेतन बढ़ोतरी की मांग कर रहे फैक्टरी श्रमिकों का प्रदर्शन पिछले महीने नोएडा के कुछ हिस्सों में हिंसक हो गया था।
अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के कई श्रमिक वेतन संशोधन की अपनी पुरानी मांग को लेकर एकत्र हुए थे और उन्होंने प्रदर्शन के दौरान नारे लगाए थे। हालांकि, प्रदर्शन हिंसा में बदल गया और कुछ प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर तोड़फोड़ की, पथराव किया और एक वाहन में आग लगा दी।
भाषा
सिम्मी मनीषा
मनीषा

Facebook


