सूरत में बारिश से जनजीवन ठप, 3,800 से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए; मुख्यमंत्री पटेल ने स्थिति की समीक्षा की
सूरत में बारिश से जनजीवन ठप, 3,800 से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए; मुख्यमंत्री पटेल ने स्थिति की समीक्षा की
सूरत (गुजरात), आठ जुलाई (भाषा) गुजरात के सूरत शहर में बुधवार सुबह समाप्त हुए 24 घंटों के भीतर 358 मिलीमीटर (मिमी) बारिश दर्ज की गई, जिससे शहर के ‘खाड़ी’ क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए और जगह-जगह जलजमाव के कारण सामान्य जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
अधिकारियों ने बताया कि शहर के निचले इलाकों से 3,400 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है और 3,800 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान राज्य में बारिश की स्थिति की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि वह बृहस्पतिवार को सूरत और वलसाड का दौरा करेंगे।
राज्य आपातकालीन अभियान केंद्र (एसईओसी) के आंकड़ों के अनुसार, सूरत शहर में मंगलवार सुबह छह बजे से बुधवार सुबह 6 बजे के बीच 14.09 इंच या 358 मिमी बारिश हुई। हालांकि बाद में बारिश थम गई, लेकिन शहर और आसपास के इलाकों में स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रही।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में लोग घुटनों तक पानी में चलते नजर आ रहे हैं। कई लोग जलमग्न सड़कों पर बंद पड़े दुपहिया वाहनों को धक्का देते दिखे। कई जगहों पर पानी घरों, व्यावसायिक परिसरों और दुकानों में भी घुस गया, जिससे जलभराव के कारण सिटी बस सेवाओं सहित सार्वजनिक परिवहन ठप हो गया। वराछा इलाके में पोद्दार आर्केड की भूतल की दुकानें पूरी तरह से पानी में डूब गईं।
सूरत नगर निगम ने एक बयान में कहा, “187 स्थानों पर जलजमाव के कारण कुल 3,489 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है और 3,897 लोगों को राहत केंद्रों में स्थानांतरित किया गया है।”
बयान में यह भी बताया गया कि प्रभावितों के बीच भोजन के 12,218 पैकेट, 5,150 पानी की बोतलें और दूध के 400 पैकेट बांटे गए हैं।
सूरत के जिलाधिकारी तेजस परमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “लिंबायत, उधना, वराछा और कडोदरा सहित खाड़ी के नजदीकी इलाकों में जलभराव की समस्या बनी हुई है।”
सूरत में ‘खाड़ी’ क्षेत्र स्थानीय रूप से उन निचले इलाकों को कहा जाता है जो शहर के बीच से गुजरने वाली बरसाती जल-निकास नालियों या सहायक नदियों के किनारे बसे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि शहर के जलमग्न इलाकों में स्थित बहुमंजिला इमारतों में भी भोजन के पैकेट बांटे गए हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि राहत और बचाव कार्यों के लिए सूरत में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की दो टीमों और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की पांच टीमों को तैनात किया गया है।
सूरत जिलाधिकारी के आधिकारिक ‘एक्स’ खाते से एक पोस्ट में कहा गया, “सूरत के मीठीखाड़ी इलाके में एनडीआरएफ की टीम छह द्वारा बाढ़ राहत और बचाव अभियान चलाया गया, जिसमें महिला बचावकर्मियों ने नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला।”
एनडीआरएफ की टीमों को नावों के जरिए छाती तक गहरे पानी वाले इलाकों से लोगों को निकालते देखा गया, जबकि पुलिस कर्मी बच्चों को अपनी गोद में उठाकर ले जाते दिखे।
जिलाधिकारी परमार ने कहा, “सुरक्षा उपाय के तौर पर जिले के सभी स्कूलों, कॉलेजों और आंगनबाड़ियों में आठ जुलाई को छुट्टी घोषित कर दी गई थी। नागरिकों से अनुरोध है कि जब तक बहुत जरूरी काम न हो, वे अपने घरों से बाहर न निकलें।”
सूरत जिले की पलसाना तहसील में मंगलवार सुबह छह बजे से बुधवार सुबह छह बजे के बीच 18.19 इंच (462 मिमी) बारिश दर्ज की गई, इसके बाद कामरेज में 17.40 इंच (442 मिमी) बारिश हुई। बारडोली में 9.37 इंच (238 मिमी) और अंबिका में 9.25 इंच (235 मिमी) बारिश दर्ज की गई।
भाषा सुमित प्रशांत
प्रशांत

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