जन विश्वास नहीं, ‘जन के साथ विश्वासघात’ विधेयक है; जेपीसी के पास भेजा जाए: विपक्ष

जन विश्वास नहीं, ‘जन के साथ विश्वासघात’ विधेयक है; जेपीसी के पास भेजा जाए: विपक्ष

जन विश्वास नहीं, ‘जन के साथ विश्वासघात’ विधेयक है; जेपीसी के पास भेजा जाए: विपक्ष
Modified Date: April 1, 2026 / 05:15 pm IST
Published Date: April 1, 2026 5:15 pm IST

नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने जन विश्वास विधेयक को ‘‘जन के साथ विश्वासघात’’ विधेयक करार देते हुए बुधवार को लोकसभा में कहा कि इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा जाना चाहिए।

कांग्रेस सांसद प्रशांत पडोले ने ‘जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा में भाग लेते हुए आरोप लगाया कि सरकार ‘मनी माइंडेड’ है जो सिर्फ पूंजीपतियों का ध्यान रखती है।

उन्होंने कहा कि पहले श्रम कानूनों को कमजोर किया गया, छोटे उद्योगों को खत्म किया गया और अब ‘‘सूट-बूट की सरकार’’ ऐसा विधेयक लेकर आई है जो जनता की आवाज दबाने का काम करेगा।

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि यह ‘‘जन विश्चास नहीं, बल्कि जन के साथ विश्चासघात’’ विधेयक है।

पडोले कहा, ‘‘मैं इस विधेयक को तत्काल जेपीसी (संसद की संयुक्त समिति) के पास भेजने की मांग करता हूं।’’

चर्चा में भाग लेते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि जन विश्वास विधेयक असल में ‘‘पूंजीपति विश्वास’’ विधेयक है जिससे सरकार की कॉर्पोरेट मानिसकता वाला चरित्र उजागर होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

विधेयक पर लोकसभा की प्रवर समिति विचार कर चुकी है।

सिन्हा ने कहा कि यह बिहार के गरीबों और मजदूरों के हितों के विपरीत है तथा ‘‘पैसा देकर बच निकलो’’ वाली नीति को बढ़ावा देने वाला है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के सांसद नीलेश लंके ने विधेयक को स्थायी समिति के पास भेजने का आग्रह किया।

शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम में सुधार करने की जरूरत है क्योंकि इसका उपयोग करके मुंबई बंदरगाह प्राधिकरण दक्षिणी मुंबई के कुछ इलाकों के निवासियों से अत्यधिक किराया वसूल रहा है।

उन्होंने कहा कि बिल्डरों में इस बात का भय होना चाहिए कि वे लोगों को परेशान करेंगे तो उन्हें दंड मिलेगा।

शिससेना सांसद रवींद्र वायकर ने कहा कि विधेयक में अधिकारियों की कार्यशैली में सुधार पर जोर दिया गया है जो बहुत सकारात्मक कदम है।

उन्होंने कहा कि जिन 717 अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है उसके बारे में जनता को जागरूक करना चाहिए।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता राजेश वर्मा ने कहा कि यह विधेयक गुलामी की जंजीरों को तोड़ने वाला है।

कांग्रेस सांसद कडियम काव्या ने कहा कि यह विधेयक सुधार नहीं है, बल्कि गलत कृत्य करने वाले सफेदपोश लोगों को रियायत देने वाला कदम है।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक का नाम जनविश्चास है, लेकिन यह जनता का विश्वास कम करने वाला है।

भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यह विधेयक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मददगार साबित होगा।

उन्होंने कहा कि सुनियोजित अपराध को किसी भी तरह से अपराध की श्रेणी से बाहर नहीं किया गया है, सिर्फ यह प्रयास किया गया है कि मामूली गलतियों को अपराध न माना जाए।

भाजपा सांसद ने कहा कि सरकार कानून को न्यायसंगत बना रही है।

भाषा

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