भारत में खतरनाक उमस भरी गर्मी वाले दिनों की संख्या बढ़ी: विश्लेषण

भारत में खतरनाक उमस भरी गर्मी वाले दिनों की संख्या बढ़ी: विश्लेषण

भारत में खतरनाक उमस भरी गर्मी वाले दिनों की संख्या बढ़ी: विश्लेषण
Modified Date: June 24, 2026 / 05:36 pm IST
Published Date: June 24, 2026 5:36 pm IST

नयी दिल्ली, 24 जून (भाषा) भारत में खतरनाक उमस भरी गर्मी वाले दिनों की संख्या 1970 के दशक के प्रति वर्ष औसतन 101 दिन से बढ़कर 2016-2025 के बीच सालाना 141 दिन हो गई। एक नये विश्लेषण में यह जानकारी दी गई है।

खतरनाक उमस भरी गर्मी वाला दिन वह होता है, जब रोजाना का अधिकतम ‘वेट-बल्ब’ तापमान 25 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो।

‘वेट-बल्ब’ तापमान गर्मी और उमस को मिलाकर यह बताता है कि मानव शरीर को वातावरण असल में कितना मुश्किल या असहज महसूस हो रहा है।

ऐसे दिनों की बढ़ती संख्या खतरनाक है, क्योंकि उमस भरी गर्मी शरीर को शीतल रखने की मुख्य प्रक्रिया (पसीना आने) को प्रभावित कर सकती है और गर्मी से जुड़ी कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकती है।

यह विश्लेषण बुधवार को ‘क्लाइमेट सेंट्रल’ ने जारी किया, जो वैज्ञानिकों और संप्रेषकों का एक स्वतंत्र समूह है। यह बदलते मौसम और लोगों के जीवन पर इसके असर से जुड़े तथ्यों पर शोध करता है।

खतरनाक उमस भरी गर्मी वाले दिनों की संख्या में बढ़ोतरी का सामना करने वाला भारत अकेला देश नहीं है।

विश्लेषण के अनुसार, दुनिया भर में ऐसे दिनों की संख्या दोगुनी से भी अधिक हो गई है। यह संख्या 1970 के दशक के प्रति वर्ष 10 दिन से बढ़कर 2016-25 के बीच सालाना 23 दिन हो गई।

सर्वाधिक बढ़ोतरी उष्णकटिबंधीय आर्द्र क्षेत्रों में हुई, जहां ‘वेट-बल्ब’ तापमान आम तौर पर अधिक होता है और खतरनाक स्तर के करीब पहुंच जाता है।

विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि 1970 के बाद से दुनिया भर में खतरनाक उमस भरी गर्मी वाले दिनों में से दो-तिहाई (64 प्रतिशत) दिनों के लिए मानव जनित जलवायु परिवर्तन जिम्मेदार है।

विश्लेषण में कहा गया है, ‘‘खतरनाक उमस भरी गर्मी वाले दिनों के लिए जलवायु परिवर्तन अब एक मामूली वजह से बदलकर मुख्य वजह बन गया है। दुनिया के कुछ हिस्सों में, उमस भरी गर्मी – जो जलवायु परिवर्तन के बिना शायद ही कभी होती या लगभग नामुमकिन होती – अब वहां की एक आम बात बन गई है, जिससे लाखों लोगों का जीवन जोखिम में पड़ गया है।’’

भाषा सुभाष नरेश

नरेश


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