ओडिशा: हाथी के शव को 32 टुकड़ों में काटकर अलग-अलग स्थानों पर दफनाया गया

ओडिशा: हाथी के शव को 32 टुकड़ों में काटकर अलग-अलग स्थानों पर दफनाया गया

ओडिशा: हाथी के शव को 32 टुकड़ों में काटकर अलग-अलग स्थानों पर दफनाया गया
Modified Date: January 26, 2026 / 09:22 pm IST
Published Date: January 26, 2026 9:22 pm IST

ब्रह्मपुर, 26 जनवरी (भाषा) ओडिशा में संदिग्ध रूप से करंट लगने से मारे गए एक जंगली हाथी के शव को 32 टुकड़ों में काटकर कंधमाल और कालाहांडी जिलों की अलग-अलग जगहों पर दफना दिया गया। वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों के अनुसार, कंधमाल जिले के बालिगुडा वन प्रभाग में एक जंगली हाथी की मौत के बाद विभागीय कार्रवाई से बचने के लिए वन अधिकारियों ने बिना किसी सूचना या उच्च अधिकारी की अनुमति के शव का निपटान कर दिया।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि शव को आसानी से ले जाने के लिए 32 टुकड़ों में काटा गया था।

ब्रह्मपुर के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आरसीसीएफ) विश्वनाथ नीलन्नवर ने बताया कि वन अधिकारियों ने कालाहांडी और कंधमाल जिलों में क्रमशः ताहनसिर और झिरीपानी से टुकड़े बरामद किए।

नीलन्नवर ने बताया कि बेलघर के प्रभारी रेंजर बिनय कुमार बिशी और अन्य लोगों के खिलाफ तथ्यों को छिपाने व सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में वन्यजीव अपराध का मामला दर्ज किया गया है।

बिशी को निलंबित कर दिया गया और वह फरार है।

नीलन्नवर ने बताया कि बिशी पर वन्यजीव अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान जारी है।

वन अधिकारी ने कहा कि शव के टुकड़ों को ले जाने के लिए कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए तीन वाहन जब्त किए गए हैं और वाहन मालिकों में से एक हृषिकेश पांडा को गिरफ्तार कर लिया गया है।

वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमारा विभाग इस अपराध में शामिल पाए जाने वाले वन अधिकारियों और अन्य सभी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।”

नीलन्नवर ने बताया कि मामले के जांच अधिकारी (सहायक वन संरक्षक, बालिगुडा) ने शिकार-रोधी दस्ते के आठ सदस्यों को नोटिस जारी कर मुख्यालय न छोड़ने और आवश्यकता पड़ने पर जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया।

उन्होंने बताया कि हाथी की उम्र, लिंग और मृत्यु के कारण का पता लगाने के लिए शव के नमूने ओयूएटी की एक फॉरेंसिक प्रयोगशाला में भेजे गए हैं।

भाषा जितेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल


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