यूनेस्को की संभावित सूची में तीन बौद्ध स्थलों को शामिल किए जाने का ओडिशा सरकार ने किया स्वागत
यूनेस्को की संभावित सूची में तीन बौद्ध स्थलों को शामिल किए जाने का ओडिशा सरकार ने किया स्वागत
भुवनेश्वर, 24 जनवरी (भाषा) ओडिशा सरकार ने राज्य के तीन प्रमुख बौद्ध स्थलों- रत्नागिरि, ललितगिरि और उदयगिरि, को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता देने पर विचार करने के लिए भारत की संभावित सूची में शामिल किए जाने के यूनेस्को के कदम का शनिवार को स्वागत किया।
ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवती परिदा ने कहा कि तीनों बौद्ध स्थलों ने प्राचीन ज्ञान से लेकर वैश्विक मान्यता तक का सफर तय किया है।
परिदा राज्य के पर्यटन विभाग की प्रभारी मंत्री भी हैं। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “रत्नागिरि, उदयगिरि और ललितगिरि को यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल किया गया है।”
परिदा ने कहा कि यूनेस्को की संभावित सूची में राज्य के तीन बौद्ध स्थलों को जगह दिया जाना विरासत, संरक्षण और सतत पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “यूनेस्को ने ओडिशा के तीन रत्नों- रत्नागिरि, ललितागिरि और उदयगिरि, को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता देने के लिए भारत की संभावित सूची में शामिल किया है। यह हमारे राज्य, हमारी संस्कृति और विरासत के लिए गर्व की बात है।”
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यूनेस्को के विश्व धरोहर केंद्र के निदेशक लजारे एलोंडू असोमो ने यूनेस्को में भारत के राजदूत और स्थाई प्रतिनिधि विशाल वी शर्मा को लिखे पत्र में पुष्टि की कि भारत ने संबंधित प्रस्ताव से जुड़े दस्तावेज 22 दिसंबर 2025 को जमा किए थे।
पत्र में कहा गया है, “चूंकि, प्रस्ताव सभी प्रक्रियागत दिशा-निर्देशों के अनुरूप था, इसलिए यूनेस्को ने भारत की संभावित सूची को अद्यतन कर सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण इन स्थलों को शामिल किया है।”
ओडिशा के इतिहास के अनुसार, रत्नागिरि, ललितागिरि और उदयगिरि को बौद्ध सर्किट के ‘हीरा त्रिकोण’ के रूप में जाना जाता है, जिनके बारे में माना जाता है कि वहां बौद्ध धर्म के तीनों संप्रदायों-हीनयान, महायान और वज्रयान, का प्रसार हुआ था।
सूत्रों ने बताया कि भारत की ओर से विश्व धरोहर सम्मेलन के लिए नोडल एजेंसी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने संबंधित दस्तावेज जुटाए और विशाल वी शर्मा के माध्यम से यूनेस्को के विश्व धरोहर केंद्र के समक्ष नामांकन पेश किया।
ये तीनों स्थल महायान और वज्रयान परंपराओं की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित करते हैं और इनमें मठ, स्तूप, मूर्तियां एवं शिलालेख शामिल हैं, जो पूरे एशिया में बौद्ध धर्म के प्रसार में ओडिशा की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हैं।
इतिहासकार अनिल धीर ने कहा कि ओडिशा के अविभाजित कटक जिले में स्थित रत्नागिरि, उदयगिरि और ललितगिरि को संभावित सूची में शामिल करने से इस क्षेत्र में विरासत पर्यटन, अनुसंधान और संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने में भी मदद मिलेगी।
भाषा पारुल सुरेश
सुरेश


Facebook


