आठ साल में केवल 42 पालतू पशु की दुकानों का पंजीकरण,एमसीडी की नीति का इंतजार

आठ साल में केवल 42 पालतू पशु की दुकानों का पंजीकरण,एमसीडी की नीति का इंतजार

आठ साल में केवल 42 पालतू पशु की दुकानों का पंजीकरण,एमसीडी की नीति का इंतजार
Modified Date: June 26, 2026 / 09:25 pm IST
Published Date: June 26, 2026 9:25 pm IST

नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण (पेट शॉप) नियम लागू होने के लगभग आठ वर्ष बाद भी दिल्ली में केवल 42 पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं, जबकि पालतू पशु दुकान संचालकों को एक भी व्यापार लाइसेंस जारी नहीं किया गया है, क्योंकि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) अब तक इससे संबंधित आवश्यक लाइसेंस नीति तैयार नहीं कर सका है।

दिल्ली पशु कल्याण बोर्ड (डीएडब्ल्यूबी) द्वारा जारी किए गए ये पंजीकरण वर्ष 2018 के नियमों के तहत पहली बार जारी किए गए हैं।

इन नियमों के अनुसार, जीवित पशुओं को रखने, बेचने या प्रदर्शित करने वाले प्रत्येक प्रतिष्ठान के लिए बोर्ड से पंजीकरण और दिल्ली नगर निगम से व्यापार लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है।

इस बीच, नगर निगम ने कहा है कि वह अपनी लंबे समय से लंबित लाइसेंस नीति को जल्द ही मंजूरी के लिए सदन के समक्ष पेश करेगा।

हालांकि नियमों के तहत पहली अनिवार्यता यानी पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था अब तक लागू नहीं हो सकी है। इसके कारण पालतू पशु दुकानों के संचालक नियमों के तहत निर्धारित पूरी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

पशुपालन विभाग (एएचडी) के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम सभी पंजीकृत पालतू पशु दुकानों को व्यापार लाइसेंस के लिए एमसीडी से संपर्क करने की सलाह देते हैं, क्योंकि नियमों के तहत पंजीकरण और लाइसेंस, दोनों अनिवार्य हैं।

कई दुकान संचालकों ने हमें बताया कि उन्होंने निगम से संपर्क किया, लेकिन वहां लाइसेंस जारी करने की कोई व्यवस्था नहीं थी।’’

हालांकि, नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि लाइसेंस नीति का मसौदा वर्ष 2022 में तैयार कर लिया गया था, लेकिन परामर्श प्रक्रिया के दौरान उठाई गई आपत्तियों के कारण इसे मंजूरी मिलने में देरी हुई।

अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2024 में इस प्रस्ताव की फिर से समीक्षा की गई, लेकिन तब से यह लंबित है।

नगर निगम के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘परामर्श प्रक्रिया के दौरान सुझाए गए सभी बदलावों को मसौदे में शामिल कर लिया गया है। इसे जल्द ही मंजूरी के लिए सदन के समक्ष पेश किया जाएगा, जिसके बाद पालतू पशु दुकानों को लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।’’

हालांकि प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन अधिकारियों और पशु कल्याण कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस कवायद से कई ऐसी कमियां उजागर हुई हैं, जो अब भी शहर में पालतू पशुओं के कारोबार के नियमन में बाधा बनी हुई हैं।

बोर्ड के अनुसार, करीब 250 दुकान संचालकों ने शपथपत्र देकर घोषणा की है कि वे केवल पालतू पशुओं का भोजन, उनसे जुड़े सामान या देखभाल संबंधी उत्पाद बेचते हैं तथा जीवित पशुओं को न तो रखते हैं और न ही उनका कारोबार करते हैं।

चूंकि ‘पेट शॉप नियम’ केवल जीवित पशुओं के कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों पर लागू होते हैं, इसलिए ऐसे प्रतिष्ठानों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य नहीं है।

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘यदि क्षेत्रीय सत्यापन या किसी शिकायत के आधार पर यह पाया जाता है कि किसी प्रतिष्ठान में जीवित पशुओं का भी कारोबार किया जा रहा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। मुश्किल यह है कि निरीक्षण के दौरान ऐसे लेनदेन हमेशा सामने नहीं आते।’’

पशु कल्याण कार्यकर्ता अशर जेसुदॉस ने कहा कि केवल घोषणाओं के आधार पर नियामकीय निगरानी का विकल्प नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा, ‘‘नियम कारोबारों के बीच उनके दावे के आधार पर कोई भेद नहीं करते। ये नियम उन सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होते हैं, जहां जीवित पशुओं को रखा जाता है या उनका कारोबार किया जाता है। इसका पता केवल नियमित निरीक्षण और प्रभावी प्रवर्तन के माध्यम से ही लगाया जा सकता है।’’

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘इसका उद्देश्य दुकान संचालकों को यह समझाना था कि पंजीकरण केवल एक प्रमाणपत्र नहीं है। नियमों में ऐसे न्यूनतम मानक निर्धारित किए गए हैं, जिनका पालन जीवित पशुओं का कारोबार करने वाले प्रत्येक प्रतिष्ठान के लिए अनिवार्य है।’’

इन मानकों में पर्याप्त वेंटिलेशन, कम शोर वाली निकास (एग्जॉस्ट) प्रणाली, स्वच्छ भोजन और पानी की उपलब्धता, पशुओं की चिकित्सकीय निगरानी, टीकाकरण, संबंधित प्रजाति के अनुरूप रहने का स्थान तथा खरीदे और बेचे गए प्रत्येक पशु का रिकॉर्ड रखना शामिल है।

नियमों के अनुसार, पंजीकृत पालतू पशु दुकानों का पंजीकरण के तीन महीने के भीतर निरीक्षण किया जाना चाहिए और इसके बाद कम से कम वर्ष में एक बार निरीक्षण अनिवार्य है।

भाषा राखी संतोष

संतोष


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