नयी दिल्ली, 25 मार्च (भाषा) विपक्षी दलों के सांसदों ने दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 को आर्थिक असमानता लाने वाला बताते हुए कहा कि सरकार को और कड़ा तथा मजबूत कानून लाना चाहिए।
विधेयक पर लोकसभा में चर्चा में भाग लेते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के वीरेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक छोटे व्यापारियों, किसानों और बड़ी कंपनियों के बीच भेद पैदा करेगा।
उन्होंने कहा कि 2016 में पहली बार दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के माध्यम से इस संबंध में कानून लाया गया था और उस वक्त सरकार ने बहुत बड़े-बड़े दावे किए थे कि बैंकों का एक-एक पैसा वापस दिलाएंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
सपा सांसद ने कहा कि यह विधेयक आर्थिक असमानता बढ़ा सकता है और बैंको की वित्तीय स्थिति को कमजोर कर सकता है।
तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने भी कहा कि दिवाला से संबंधित कानून 2016 में पहली बार लाया गया था क्योंकि कॉरपोरेट दिवाला शोधन का कोई रास्ता नहीं मिल पा रहा था।
उन्होंने कहा कि शुरुआती तीन साल में कानून के अच्छे परिणाम सामने आए और दिवाला शोधन में भारत की वैश्विक रैंकिंग 136 से 57 पर पहुंची, लेकिन अब संहिता काम नहीं कर रही।
राय ने कहा कि बाद में संशोधन विधेयक लाया गया, जो प्रवर समिति को भेजा गया और समिति की विस्तृत रिपोर्ट के बाद यह विधेयक सदन में लाया गया है, लेकिन अब भी इसे लेकर कुछ चिंताएं हैं।
उन्होंने कहा कि आईबीसी के लिए अब उत्साह नहीं है और इसका मूल कारण राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) में मामलों का समय पर निस्तारण नहीं हो पाना है।
राय ने कहा कि संशोधन विधेयक पर्याप्त रूप से सुदृढ़ नहीं है और इससे समस्या का सामधान नहीं निकलेगा, इसलिए प्रस्तावित कानून को और मजबूत करने की जरूरत है।
भाषा वैभव सुभाष
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