पश्चिम एशिया पर संसद में चर्चा कराने की विपक्ष की मांग स्वीकार किये जाने की संभावना नहीं

पश्चिम एशिया पर संसद में चर्चा कराने की विपक्ष की मांग स्वीकार किये जाने की संभावना नहीं

पश्चिम एशिया पर संसद में चर्चा कराने की विपक्ष की मांग स्वीकार किये जाने की संभावना नहीं
Modified Date: March 9, 2026 / 05:34 pm IST
Published Date: March 9, 2026 5:34 pm IST

नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट पर संसद में चर्चा कराने संबंधी विपक्ष की मांग को सरकार द्वारा स्वीकार किये जाने की संभावना नहीं है क्योंकि विदेश मंत्री एस जयशंकर दोनों सदनों को इस मुद्दे पर जानकारी दे चुके हैं।

सूत्रों ने बताया कि सरकार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाये गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करना चाहती है, जिस पर अब मंगलवार को चर्चा होने की संभावना है क्योंकि पश्चिम एशिया पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन के कारण कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में स्थिति पर संसद में कोई चर्चा नहीं होगी क्योंकि विदेश मंत्री दोनों सदनों को इस बारे में जानकारी दे चुके हैं।

पश्चिम एशिया में स्थिति पर चर्चा की मांग को लेकर सोमवार को लोकसभा में हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार के स्थगन के बाद तीसरी बार दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी। सरकार ने विपक्ष पर सदन के नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ‘‘पश्चिम एशिया में स्थिति’’ पर बयान देने के लिए जैसे ही खड़े हुए, विपक्षी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाने शुरू कर दिए और पश्चिम एशिया में जारी संकट पर विस्तृत चर्चा की मांग की।

पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने विपक्षी सदस्यों से सदन चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘आप लोग सदन में तख्तियां लेकर आए हैं, आप यह पहले से तय करके आएं है कि सदन नहीं चलने देना है।’’

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कांग्रेस पर गैरजिम्मेदार विपक्षी दल होने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि लगता है कि विपक्ष असमंजस में है क्योंकि पहले वह खुद लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ ‘अनावश्यक’ प्रस्ताव लेकर आया और अब दूसरा विषय लेकर आ गया।

रीजीजू ने कहा कि सरकार लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष चर्चा शुरू करे।

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम एशिया में संघर्ष और इसकी वजह से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर सोमवार को उच्च सदन में संक्षिप्त चर्चा कराने की मांग की।

इसी बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर सदन में अपनी ओर से एक बयान दिया। इस पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी सदस्यों ने विरोध जताया। उन्होंने मांग की कि बयान से पहले सदन में इस मुद्दे पर संक्षिप्त चर्चा होनी चाहिए।

विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच, जयशंकर ने अपना बयान पूरा किया। बयान खत्म होने से पहले, विपक्षी सदस्य चर्चा की मांग पूरी न होने पर विरोध जताते हुए सदन से बहिर्गमन कर गए।

सदन के बाहर, खरगे, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित विपक्षी सांसदों ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने इससे संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार की ‘‘चुप्पी’’ की कड़ी आलोचना की।

इससे पहले, संसद परिसर में, खरगे के कक्ष में विपक्षी दलों के नेताओं ने बजट सत्र के दूसरे चरण की रणनीति पर विचार-विमर्श करने के लिए बैठक की।

खरगे ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल का युद्ध हमारे पड़ोस तक पहुंच गया है। इस संदर्भ में, वर्तमान भू-राजनीतिक संकट पर व्यापक चर्चा करने की आवश्यकता है।’’

खरगे ने बैठक के बाद कहा, ‘‘विदेश मंत्री का एकतरफा बयान समाधान नहीं है। हमें सामूहिक रूप से राष्ट्र को विश्वास में लेना होगा। भारत सरकार को हमारी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, हमारे व्यापारियों की सहायता करने, हमारे निर्यात के लिए आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने और महंगाई के नाम पर जनता को दंडित करना बंद करने के लिए एक विस्तृत आपातकालीन योजना बनानी चाहिए।’’

भाषा सुभाष वैभव

वैभव


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