सेवानिवृत्ति अधिकारी के नाम बदलकर संपत्ति पर दावे के मामले में जांच का खुलासा करने का आदेश

सेवानिवृत्ति अधिकारी के नाम बदलकर संपत्ति पर दावे के मामले में जांच का खुलासा करने का आदेश

सेवानिवृत्ति अधिकारी के नाम बदलकर संपत्ति पर दावे के मामले में जांच का खुलासा करने का आदेश
Modified Date: March 31, 2026 / 08:24 pm IST
Published Date: March 31, 2026 8:24 pm IST

(मोहित सैनी)

नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) सेवा के दौरान अलग-अलग पहचान के तहत संपत्ति अर्जित करने और सेवानिवृत्ति के बाद उनके स्वामित्व का दावा करने के आरोप भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के एक सेवानिवृत्त अधिकारी पर लगे हैं। केंद्रीय सूचना आयोग ने इस ‘‘बेहद अनोखे’’ कथित तौर-तरीके का पर्दाफाश करने को लेकर जांच के खुलासे का आदेश दिया है।

आयोग ने कहा कि जांच का खुलासा ‘‘आंखें खोल देने वाला’’ साबित हो सकता है। यह मामला केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के समक्ष दायर आरटीआई (सूचना का अधिकार) आवेदनों से सामने आया, जिनमें विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट, नोटशीट सहित फाइल की प्रगति, शिकायत नंबर और राजस्व विभाग के सचिव द्वारा भेजे गए ईमेल की प्रति की मांग की गई थी।

आरटीआई आवेदन उसी व्यक्ति द्वारा दायर किए गए थे जिसने पहले अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और बाद में जांच का विवरण मांगा था।

शिकायत में शामिल आरोप आईआरएस अधिकारी के कथित धोखाधड़ीपूर्ण कृत्यों से जुड़े गंभीर दावों से संबंधित हैं, जिसमें सेवा के दौरान संपत्ति अलग-अलग पहचान के तहत अर्जित करने के उद्देश्य से उनके और उनकी पत्नी द्वारा छद्म उपनामों के इस्तेमाल का आरोप शामिल है।

आयोग ने कहा, ‘‘अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क विभाग की सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद, संबंधित अधिकारी ने अपना नाम बदलकर उन संपत्तियों का वास्तविक स्वामी घोषित कर दिया। ऐसे आरोप अपने आप में गंभीर हैं और इनकी पारदर्शी एवं व्यवस्थित जांच आवश्यक है।’’

सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने टिप्पणी की, ‘‘सेवानिवृत्ति के बाद अपना नाम बदलकर सेवानिवृत्ति से पहले उस नाम पर अर्जित संपत्तियों पर दावा करने का अधिकारी का कथित तौर पर अपनाया गया तरीका, निश्चित रूप से बेहद अनोखा है।’’

केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने सूचना देने से इनकार करते हुए कहा, ‘‘शिकायत की जांच की जा रही है और इसे आरटीआई अधिनियम, 2005 के अध्याय दो की धारा 8(1)(एच) के तहत प्रदान नहीं किया जा सकता है।’’

इसे खारिज करते हुए आयोग ने कहा, ‘‘आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(एच) के तहत दावा की गई छूट वर्तमान मामले के तथ्यों और परिस्थितियों में टिकाऊ नहीं है, क्योंकि संबंधित समय पर कोई जांच लंबित नहीं थी जिसे सूचना के उजागर करने से बाधित किया जा सकता था।’’

आयोग ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट नहीं किया गया कि संबंधित जानकारी, विशेष रूप से फाइल, नोट-शीट और अपीलकर्ता द्वारा दर्ज शिकायत के संबंध में कार्रवाई रिपोर्ट उपलब्ध कराने से जांच पर किसी प्रकार से नकारात्मक प्रभाव पड़ता।’’

आयोग ने कहा कि छूट को ‘‘समुचित तर्क दिए बिना, एक सामान्य और यांत्रिक तरीके से’’ लागू किया गया। आयोग ने यह भी टिप्पणी की, ‘‘आयोग को लगता है कि इस मामले में कुछ गड़बड़ है।’’

पारदर्शिता पर जोर देते हुए आयोग ने कहा, ‘‘जांच पर संभावित नकारात्मक प्रभाव को स्पष्ट रूप से साबित किए बिना पूरी फाइल विवरण और कार्रवाई रिपोर्ट तक पहुंच से इंकार करना, प्रतिवादी सार्वजनिक प्राधिकरण की ओर से अपर्याप्त पारदर्शिता का आभास पैदा करता है।’’

आयोग ने प्राधिकरण को निर्देश दिया कि वह आरटीआई आवेदनों में मांगी गई फाइल के संबंध में जानकारी, कार्रवाई की रिपोर्ट और संबंधित पत्राचार को लेकर सूचना तीन सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराए।

भाषा आशीष नरेश

नरेश


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