पिछले एक दशक में स्वास्थ्य देखभाल पर जेब से होने वाले खर्च में काफी कमी आयी: नड्डा
पिछले एक दशक में स्वास्थ्य देखभाल पर जेब से होने वाले खर्च में काफी कमी आयी: नड्डा
नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शनिवार को कहा कि भारत में पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवा पर जेब से होने वाले (बीमा कवर से इतर) खर्च में काफी कमी आई है, जिससे परिवारों, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर वित्तीय बोझ कम हुआ है।
उन्होंने देहरादून में स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के आठवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए ये टिप्पणियां कीं।
भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में पिछले 11 वर्षों में हुई अभूतपूर्व प्रगति पर प्रकाश डालते हुए नड्डा ने कहा कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की संख्या छह से बढ़कर 23 हो गई है, जिससे देश भर में उन्नत तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में काफी विस्तार हुआ है।
उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़कर लगभग 89 प्रतिशत हो गई है, जो मातृ स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों के सुदृढ़ होने को दर्शाती है।
स्वास्थ्य सेवा में वित्तीय सुरक्षा पर जोर देते हुए नड्डा ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के बारे में बात की, जो प्रति परिवार पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि इस योजना से अब लगभग 62 करोड़ लोगों को लाभ मिल रहा है, जो भारत की लगभग 40 प्रतिशत आबादी को कवर करता है।
नड्डा ने कहा, ‘‘पिछले एक दशक में भारत में स्वास्थ्य सेवा पर जेब से होने वाले खर्च में काफी कमी आई है, जिससे परिवारों, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर वित्तीय बोझ कम हुआ है।’’
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वैश्विक आबादी के लगभग छठे हिस्से का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में दिए गए रुझानों के अनुरूप निरंतर मच्छर-जनित रोग नियंत्रण प्रयासों के माध्यम से मलेरिया की घटनाओं और मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के महत्व पर जोर देते हुए मंत्री ने बताया कि नागरिकों के लिए संपर्क के पहले बिंदु के रूप में देश भर में 1.82 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर चालू किए हैं।
नड्डा ने बताया कि मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) एक दशक पहले प्रति लाख शिशु जन्म पर 130 से घटकर 88 हो गई है, जबकि शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) प्रति हजार शिशु जन्म पर 39 से घटकर 27 हो गई है, जो मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।
तपेदिक नियंत्रण प्रयासों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में टीबी की घटनाओं में काफी कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि निरंतर सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों और समुदाय-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से भारत ने टीबी के मामले में कमी लाने के लिहाज से वैश्विक औसत से बेहतर प्रदर्शन किया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने भारत के ऐतिहासिक कोविड-19 टीकाकरण अभियान का भी जिक्र किया, जिसके तहत एहतियाती और बूस्टर खुराक सहित 220 करोड़ से अधिक टीके देश भर में लगाए गए, जो भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की व्यापकता, लचीलेपन और दक्षता को दर्शाता है।
भाषा गोला संतोष
संतोष

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