मालवीय नगर अग्निकांड के बाद दहशत का माहौल; होटल बंद, अतिथि रवाना

मालवीय नगर अग्निकांड के बाद दहशत का माहौल; होटल बंद, अतिथि रवाना

मालवीय नगर अग्निकांड के बाद दहशत का माहौल; होटल बंद, अतिथि रवाना
Modified Date: June 4, 2026 / 03:53 pm IST
Published Date: June 4, 2026 3:53 pm IST

(श्रुति भारद्वाज)

नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) मालवीय नगर में अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को दक्षिण दिल्ली के प्रेस एन्क्लेव रोड पर स्थित होटल और गेस्ट हाउस खाली होने लगे हैं। विदेशी नागरिकों समेत अन्य अतिथियों ने भोजन और बिजली की व्यवस्था न होने का हवाला देते हुए कमरों को खाली करना शुरू कर दिया है।

इलाके में भय और अनिश्चितता के माहौल के बीच कुछ मकान मालिकों और होटल मालिकों ने उनके यहां ठहरे हुए लोगों से कमरे खाली करने को कहा है। कभी चौबीसों घंटे चहल-पहल वाला यह इलाका अब काफी शांत नजर आ रहा है।

फ्लोरिस्ट स्टे (जहां आग लगी) समेत फ्लोरिस्ट इन और ग्रीन रेजिडेंसी का मालिक लवकेश बजाज ही है। ये तीनों प्रतिष्ठान बृहस्पतिवार को बंद रहे और कई अतिथि अपना सामान समेटकर वहां से चले गए।

इन्हीं में से एक कांगो गणराज्य के नागरिक जिलबर्ट थे, जो फ्लोरिस्ट इन में ठहरे हुए थे।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘कल से खाने की कोई व्यवस्था नहीं है और बिजली भी नहीं है। हमें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, इसलिए हम यहां से जा रहे हैं। अब रहने के लिए कोई दूसरी जगह तलाशेंगे।’’

लंबे समय से इलाके के एक गेस्ट हाउस में रह रहे एक अन्य विदेशी नागरिक बिलुंगा मुकासा ने कहा कि इस हादसे ने लोगों को डरा दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘घटना के बाद लोग सहमे हुए हैं। कई मेहमान यहां से जा रहे हैं और कुछ दूसरे स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था तलाश रहे हैं क्योंकि अब उन्हें यहां रहना सुरक्षित नहीं लग रहा।’’

चिकित्सा उपचार के लिए दिल्ली आई उज्बेकिस्तान की एक महिला ने बताया कि घटना के बाद उनके गेस्ट हाउस में रहने वाले लोगों को परिसर खाली करने के लिए कहा गया है।

इलाके में स्थित कई होटल भी बंद पाए गए।

करीब 40 वर्षों से इस क्षेत्र में रह रही एक बुजुर्ग महिला ने कहा कि पिछले एक दशक में गेस्ट हाउस और मुसाफिरखानों (इन) की बढ़ती संख्या के कारण इलाके का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ग्रीन रेजिडेंसी में आमतौर पर काफी चहल-पहल रहती है, लेकिन आज वह बंद है। गेस्ट हाउस और मुसाफिरखानों की यह संस्कृति पिछले लगभग 10 वर्षों में ही शुरू हुई है। इससे पहले यह मुख्य रूप से आवासीय क्षेत्र हुआ करता था।’’

एक दुकानदार ने बताया कि आमतौर पर भीड़भाड़ वाली इस गली में अब सन्नाटा पसरा है।

उन्होंने कहा, ‘‘इन होटलों के बाहर हमेशा लोगों की आवाजाही रहती थी, लेकिन आज सुबह से सब कुछ शांत है। अधिकांश होटल बंद हैं और नए अतिथियों को नहीं ठहराया जा रहा है। कल जो हुआ, उसके बाद लोग डरे हुए हैं।’’

भाषा गोला नरेश

नरेश


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