पनुन कश्मीर ने लिखित संविधान अपनाया
पनुन कश्मीर ने लिखित संविधान अपनाया
जम्मू, 24 मई (भाषा) विस्थापित कश्मीरी पंडितों के संगठन पनुन कश्मीर ने रविवार को अपना लिखित संविधान औपचारिक रूप से अपनाया और इसे अपनी वैचारिक और संगठनात्मक निरंतरता को संरक्षित करने के उद्देश्य से किया गया एक ऐतिहासिक संस्थागत परिवर्तन बताया।
इस संगठन की मांगों में कश्मीरी पंडितों के लिए घाटी के भीतर केंद्र शासित प्रदेश की तरह एक अलग मातृभूमि बनाए जाना शामिल है।
जम्मू में कार्यकर्ताओं, वरिष्ठ सदस्यों और सामुदायिक पर्यवेक्षकों के एक सम्मेलन में संविधान पारित किया गया।
इस सम्मेलन का संचालन पनुन कश्मीर के नेता नितिन धर ने किया। उन्होंने कहा कि संविधान को अपनाने से ‘स्मृति और भावी पीढ़ियों के बीच एक सेतु’ का काम होगा और यह सुनिश्चित होगा कि कश्मीरी हिंदुओं का संघर्ष व्यक्तियों और परिस्थितियों से परे संस्थागत रूप से स्थापित रहे।
मुख्य संवैधानिक व्याख्यान देते हुए अध्यक्ष टिटो गांजू ने इस अवसर को ‘संस्थागत संकल्प का संवैधानिक पुनर्जन्म’ बताया।
उन्होंने कहा कि इस संहिताकरण ने कश्मीर घाटी के भीतर वितास्ता नदी के पूर्व और उत्तर में भारतीय संप्रभुता के अंतर्गत कश्मीरी हिंदुओं के लिए एक अलग मातृभूमि की स्थापना के प्रति आंदोलन की प्रतिबद्धता को संस्थागत रूप दिया है।
भाषा
शुभम गोला
गोला

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