यात्री संघों ने वैष्णव से धन वापसी के नये नियमों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया
यात्री संघों ने वैष्णव से धन वापसी के नये नियमों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया
नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) विभिन्न यात्री संगठनों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से आग्रह किया कि सरकार धन वापसी (रिफंड) के नये नियमों को लागू न करें, जिनके तहत यात्रियों को ट्रेन के प्रस्थान से आठ घंटे पहले तक कन्फर्म टिकट रद्द कराने पर कोई पैसा वापस नहीं मिलेगा।
वैष्णव ने मंगलवार को रेल क्षेत्र में सुधारों की घोषणा करते हुए कहा था कि इस वर्ष एक से 15 अप्रैल के बीच एक नया नियम लागू किया जाएगा, जिसके तहत यात्रियों को ट्रेन के प्रस्थान से आठ घंटे पहले तक टिकट रद्द करने पर कोई पैसा वापस नहीं मिलेगा जबकि वर्तमान नियम के अनुसार यह अवधि चार घंटे है।
वैष्णव ने कहा था कि कालाबाजारी और एजेंटों द्वारा अंतिम समय में टिकटों की बिक्री को रोकने के लिए मौजूदा रिफंड नियम में संशोधन किया जा रहा है।
उन्होंने अन्य रिफंड स्लैब में संशोधन की भी घोषणा की, जिसके अनुसार 24 से आठ घंटे पहले रद्द करने पर टिकट की कीमत में 50 प्रतिशत की कटौती होगी जबकि वर्तमान में यह कटौती 12 से चार घंटे पहले तक ही होती है।
इसी प्रकार, रेलवे प्रस्थान से 72 से 24 घंटे पहले रद्द करने पर टिकट की कीमत में 25 प्रतिशत की कटौती करेगा।
ट्रेन के प्रस्थान से 72 घंटे से अधिक पहले रद्द करने पर प्रति यात्री मामूली रद्दीकरण शुल्क को छोड़कर पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।
वर्तमान नीति के तहत, 48 से 12 घंटे पहले रद्द करने पर टिकट की कीमत में 25 प्रतिशत की कटौती होती है जबकि 48 घंटे से अधिक पहले रद्द करने पर पूरी राशि वापस कर दी जाती है।
यात्री संघों का कहना है कि धन वापसी के नए नियम से यात्रियों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा।
उनका दावा है कि रेलवे रद्द हुई बर्थ को अन्य यात्रियों को देकर दोगुनी कमाई करेगा।
कोयंबटूर जिला रेलवे यात्री कल्याण संघ के अध्यक्ष एम. जमील अहमद ने कहा, “मैं रेल मंत्री से आग्रह करता हूं कि वे धन वापसी के नए नियमों को लागू न करें। इससे यात्रियों पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ेगा।”
उन्होंने कहा, “रेलवे को धन वापसी के नियमों में संशोधन कर पैसा कमाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए। माल परिवहन में कई अन्य तरीके हैं जिनसे उन्हें राजस्व प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।”
जमील ने कहा कि अगर पांच या छह लोगों के परिवार को अगले दिन की ट्रेन में कंफर्म सीट मिल जाती है और किसी कारणवश उन्हें ट्रेन छूटने से आठ घंटे के भीतर सभी टिकट रद्द करने पड़ते हैं, तो उन्हें कोई पैसा वापस नहीं मिलेगा।
उन्होंने कहा, “रेलवे उन सीट को दूसरे यात्रियों को देकर मुनाफा कमाएगा। यह अन्याय है।”
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि धन वापसी के नियमों से किसी भी तरह का वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष

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