पटेल ने रियासतों के भारतीय संघ में विलय में असाधारण जिम्मेदारी निभाई: उपराष्ट्रपति

पटेल ने रियासतों के भारतीय संघ में विलय में असाधारण जिम्मेदारी निभाई: उपराष्ट्रपति

पटेल ने रियासतों के भारतीय संघ में विलय में असाधारण जिम्मेदारी निभाई: उपराष्ट्रपति
Modified Date: September 17, 2026 / 05:23 pm IST
Published Date: September 17, 2026 5:23 pm IST

हैदराबाद, 17 सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश के पहले उपप्रधानमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने स्वतंत्रता के बाद रियासतों का भारतीय संघ में विलय करने में असाधारण जिम्मेदारी निभाई तथा मजबूत, एकजुट ‘एक भारत’ की नींव रखी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि केवल पटेल की वजह से ही ‘एक भारत’ हमेशा ‘एक भारत’ बना रहेगा।

हैदराबाद रियासत के भारतीय संघ में विलय की वर्षगांठ पर केंद्र सरकार द्वारा आयोजित ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पटेल के योगदान को राष्ट्रीय एकीकरण के व्यापक संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि 17 सितंबर 1948 का दिन स्वतंत्र भारत के इतिहास में निर्णायक अध्याय के समापन का दिन है जब सितंबर 1948 की घटनाओं और ‘ऑपरेशन पोलो’ के बाद तत्कालीन हैदराबाद रियासत का भारतीय संघ में विलय हुआ था।

उन्होंने कहा कि हैदराबाद मुक्ति दिवस केवल किसी ऐतिहासिक तिथि का स्मरणोत्सव नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र-निर्माण की यात्रा और उन मूल्यों की याद दिलाता है जो भारत को एक सूत्र में बांधे रखते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘उस समय हैदराबाद का मुद्दा सबसे जटिल मुद्दों में एक था और जब बातचीत विफल हो गई तो भारत सरकार ने 13 सितंबर, 1948 को ‘ऑपरेशन पोलो’ शुरू किया। यह अभियान 17 सितंबर, 1948 को निजाम की सेना के आत्मसमर्पण के साथ समाप्त हुआ।’’

राष्ट्रीय एकीकरण में पटेल के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि पूर्व उप-प्रधानमंत्री ने उस समय एक असाधारण जिम्मेदारी निभाई जब भारत विभाजन के घावों से उबर रहा था और साथ ही सैकड़ों रियासतों का एक संघ में विलय कर रहा था।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘पटेल ने एक मजबूत, एकजुट ‘एक भारत’ की मजबूत नींव रखी।’’

उपराष्ट्रपति ने कहा कि जहां महात्मा गांधी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं पटेल ने रियासतों को आधुनिक भारत के साथ एकजुट करने का कार्य किया।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अब 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

हैदराबाद संघर्ष के पीछे के जनांदोलन को श्रद्धांजलि देते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि छात्रों, बुद्धिजीवियों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, किसानों और आम नागरिकों ने इस संघर्ष में भाग लिया तथा कारावास, हिंसा और भारी व्यक्तिगत कठिनाइयों का सामना किया।

उन्होंने रामजी गोड, तुर्रेबाज खान और कोमाराम भीम सहित देशभक्तों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनका साहस हमें याद दिलाता है कि इतिहास केवल सरकारी कार्यालयों या प्रसिद्ध राजनेताओं द्वारा नहीं, बल्कि उन आम नागरिकों द्वारा भी बनाया जाता है जो अन्याय को अपनी नियति मानने से इनकार कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की एकता के लिए यह आवश्यक नहीं है कि हर नागरिक एक जैसा हो। उन्होंने कहा कि भारतीय अलग-अलग भाषाएं बोल सकते हैं, अलग-अलग परंपराओं का पालन कर सकते हैं, अलग-अलग तरीके से पूजा कर सकते हैं और अलग-अलग राजनीतिक विचार रख सकते हैं, फिर भी वे संविधान और इस सिद्धांत से बंधे रहते हैं कि संप्रभुता अंततः जनता में निहित है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने हाल में छत्तीसगढ़ का दौरा किया था और उस राज्य में नक्सलवाद के खात्मे के बाद स्वास्थ्य तथा शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनकारी विकास से वह वास्तव में चकित थे।

सिकंदराबाद के परेड ग्राउंड में 79वें हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह के दौरान, राधाकृष्णन ने युद्ध स्मारक का दौरा किया और माल्यार्पण कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

इस अवसर पर तेलंगाना के राज्यपाल शिव प्रताप सिंह शुक्ल, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, जी. किशन रेड्डी, बंदी संजय कुमार, मलकाजगिरि के सांसद ए. राजेंद्र और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

भाषा शोभना राजकुमार

राजकुमार


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