मैसूरु (कर्नाटक), सात मई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने बृहस्पतिवार को कहा कि जनसंख्या नियंत्रण नीतियों और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के क्रियान्वयन के लिए जनसहयोग तथा दीर्घकालिक सोच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जाति आधारित राजनीति तभी समाप्त होगी जब समाज स्वयं जातिगत पहचान से ऊपर उठेगा।
भागवत ने यहां ‘राष्ट्रीय विकास की उत्प्रेरक के रूप में सामाजिक समरसता’ विषय पर व्याख्यान देने के बाद आयोजित संवाद कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने विभिन्न धर्मों और समुदायों के बीच सौहार्द पर जोर दिया और लोगों से नारेबाजी के बजाय आचरण के माध्यम से सामाजिक जीवन में समानता अपनाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ‘‘समाज जाति को याद रखता है, इसलिए राजनेता उसका लाभ उठाते हैं। उनका उद्देश्य वोट प्राप्त करना होता है। यदि उन्हें काम के आधार पर वोट नहीं मिलते, तो वे जाति के आधार पर वोट हासिल करेंगे।’’
जनसंख्या नियंत्रण विधेयक और समान नागरिक संहिता से जुड़े एक सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि आरएसएस सरकार नहीं, बल्कि एक सामाजिक संगठन है। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी कानून तभी सफल हो सकता है जब उसे जनता का सहयोग मिले।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले लोगों को शिक्षित करना जरूरी है। नीति आवश्यक है, लेकिन नीति तभी सफल होगी जब जनता का सहयोग मिलेगा।’’
आपातकाल के दौरान अपनाए गए जनसंख्या नियंत्रण उपायों का उल्लेख करते हुए भागवत ने कहा कि आक्रामक तरीके से लागू की गई नीतियों के कारण जनता में असंतोष पैदा हुआ था और राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली थी।
भाषा मनीषा वैभव
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