एनसीएलटी के कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका निरर्थक : दिल्ली उच्च न्यायालय

एनसीएलटी के कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका निरर्थक : दिल्ली उच्च न्यायालय

एनसीएलटी के कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका निरर्थक : दिल्ली उच्च न्यायालय
Modified Date: April 30, 2026 / 01:06 pm IST
Published Date: April 30, 2026 1:06 pm IST

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बाचू वेनकट बलराम दास को राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (एनसीएलटी) का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को बृहस्पतिवार को निरर्थक करार दिया।

अदालत ने कहा कि यह याचिका इसलिए निरर्थक हो गई है क्योंकि केंद्र सरकार एनसीएलटी के अध्यक्ष पद पर उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश को नियुक्त कर चुकी है।

न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओ. पी. शुक्ला की पीठ ने कहा कि केंद्र ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अनूपिंदर सिंह ग्रेवाल को एनसीएलटी का अध्यक्ष नियुक्त किया है।

पीठ ने कहा, “इसके साथ ही कार्यकारी अध्यक्ष के पद से संबंधित यह रिट याचिका निरर्थक हो गई है।”

पीठ ने इस याचिका पर कार्यवाही को समाप्त कर दिया। यह याचिका एनसीएलटी के तकनीकी सदस्य कौशलेंद्र कुमार सिंह ने दायर की थी।

केंद्र ने 29 अप्रैल को न्यायमूर्ति ग्रेवाल को पांच वर्षों के लिए एनसीएलटी का अध्यक्ष नियुक्त किया।

उच्च न्यायालय में, सिंह ने तर्क दिया कि कानून के अनुसार, वरिष्ठतम सदस्य को, चाहे वह न्यायिक सदस्य हो या तकनीकी सदस्य, कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करना अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि चूंकि उन्हें अधिकरण का सदस्य पहले नियुक्त किया गया था, इसलिए दास को कार्यकारी अध्यक्ष नहीं बनाया जा सकता था।

याचिकाकर्ता ने मार्च में पहले उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी और दावा किया था कि नियुक्ति की तिथि के आधार पर वह 16 मार्च को सेवानिवृत्त हुए अध्यक्ष के बाद वरिष्ठतम सदस्य हैं।

भाषा जोहेब मनीषा अविनाश

अविनाश


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