एसआईआर के कारण बेघर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप लगाने वाली याचिका खारिज

एसआईआर के कारण बेघर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप लगाने वाली याचिका खारिज

एसआईआर के कारण बेघर लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप लगाने वाली याचिका खारिज
Modified Date: September 1, 2026 / 07:45 pm IST
Published Date: September 1, 2026 7:45 pm IST

नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए निर्वाचन आयोग की घर-घर जाकर गणना की प्रक्रिया के कारण बेघर लोगों के मतदाता सूची से बाहर होने के खतरे का दावा करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया।

अदालत ने कहा कि बिना पते वाले मतदाताओं को भी मतदाता सूची में शामिल करने के लिए पहले से ही एक व्यवस्था मौजूद है।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता इंदु प्रकाश सिंह की आशंका का कोई ठोस आधार नजर नहीं आता। पीठ ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में कोई कमी नहीं है।

अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने पिछले कई वर्षों में दिल्ली में चलाए गए तोड़फोड़ अभियानों के कारण विस्थापित हुए लोगों के मतदाता सूची से बाहर होने के संबंध में केवल बिना ठोस आधार के दावे किए हैं।

पीठ ने 19 अगस्त को दिए आदेश में कहा, “मसौदा मतदाता सूची में बेघर लोगों की श्रेणी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इसमें उनके नाम, उम्र, लिंग और तस्वीर के साथ घर का नंबर ‘शून्य’ दर्ज है। इससे साफ है कि एसआईआर के दौरान निर्वाचन आयोग अपनी प्रक्रिया के अनुसार बेघर लोगों को मसौदा मतदाता सूची में शामिल कर रहा है।”

अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए, मौजूदा याचिका में किये गये किसी भी अनुरोध को स्वीकार करने का आधार नहीं बनता। परिणामस्वरूप, याचिका खारिज की जाती है।’’

अदालत ने कहा कि अगर किसी मतदाता का नाम तोड़फोड़ या स्थानांतरण के कारण मतदाता सूची से बाहर हो जाता है, तो वह मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत जारी फॉर्म-6 भर सकता है।

याचिका में बताया गया था कि दिल्ली में करीब तीन लाख बेघर लोग हैं और एसआईआर के लिए निर्वाचन आयोग की घर-घर जाकर गणना की प्रक्रिया उनके लिए ‘संरचनात्मक बाधा’ है।

निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि ऐसे बेघर लोगों या फुटपाथ पर रहने वाले लोगों, जिनके पास सामान्य निवास स्थान का कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं है, को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए पहले से ही प्रावधान हैं।

भाषा जितेंद्र नरेश

नरेश


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