बैंक खातों को ‘फ्रीज’ करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया संबंधी याचिका सीजेआई के समक्ष रखी गई

बैंक खातों को ‘फ्रीज’ करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया संबंधी याचिका सीजेआई के समक्ष रखी गई

बैंक खातों को ‘फ्रीज’ करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया संबंधी याचिका सीजेआई के समक्ष रखी गई
Modified Date: January 18, 2026 / 11:47 am IST
Published Date: January 18, 2026 11:47 am IST

नयी दिल्ली, 18 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि साइबर अपराध की जांच के दौरान बैंक खातों को ‘फ्रीज’ और ‘डी-फ्रीज’ करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने के लिए केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को निर्देश देने का अनुरोध करने वाली याचिका को भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के समक्ष रखा जाए।

खातों को ‘फ्रीज’ करने का आशय उनसे जुड़े लेन-देने पर रोक लगाने से है। न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने उच्चतम न्यायालय रजिस्ट्री को प्रधान न्यायाधीश से निर्देश लेने और मामले को तदनुसार उचित पीठ के समक्ष रखने का निर्देश दिया। इससे पहले केंद्र ने रजिस्ट्री को सूचित किया था कि सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ पहले से ही डिजिटल गिरफ्तारी से संबंधित एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही है, जिसमें यही मुद्दा विचाराधीन है।

शीर्ष अदालत ने 16 जनवरी को अपने आदेश में कहा, ‘‘अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने बताया कि अर्जी ‘बी’ और ‘सी’ के संबंध में, वे इस न्यायालय की एक अन्य पीठ के समक्ष स्वतः संज्ञान लेते हुए दायर रिट याचिका (आपराधिक) में विचाराधीन हैं। उपरोक्त के मद्देनजर, रजिस्ट्री भारत के प्रधान न्यायाधीश से उचित आदेश प्राप्त करे और मामले को तदनुसार सूचीबद्ध करे।’’

 ⁠

शीर्ष अदालत ने पहले याचिका पर विचार करने पर सहमति जताई थी जिसमें अर्जी ‘बी’ में कहा गया है कि लिखित तर्कसंगत आदेश और खाताधारक को ऐसी कार्रवाई की सूचना दिए बिना 24 घंटे के भीतर किसी भी बैंक खाते को ‘फ्रीज’ नहीं किया जाएगा और बैंक खाता ‘फ्रीज’ करने के प्रत्येक आदेश की सूचना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 106(3)/ दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 102(3) के तहत अनिवार्य रूप से उसे क्षेत्र के मजिस्ट्रेट को तुरंत दी जाएगी।

अजी ‘सी’ में केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक को साइबर अपराध जांच के दौरान बैंक खातों को ‘फ्रीज’ करने और ‘डी-फ्रीज’ करने के संबंध में एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है ताकि मनमानी कार्रवाई को रोका जा सके और देश भर में प्रक्रियात्मक निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके।

याचिका में देश भर की सभी जांच एजेंसियों, जिनमें साइबर प्रकोष्ठ भी शामिल हैं, को उचित दिशानिर्देश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी बैंक खाते को लिखित व तर्कसंगत आदेश के बिना और खाताधारक को ऐसी कार्रवाई की सूचना दिए बिना 24 घंटे के भीतर ‘फ्रीज’ न किया जाए।

भाषा

गोला संतोष

संतोष


लेखक के बारे में