विमान किराये में ‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’ रोकने के दिशानिर्देश संबंधी याचिका पर 13 जुलाई को होगी सुनवाई

विमान किराये में ‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’ रोकने के दिशानिर्देश संबंधी याचिका पर 13 जुलाई को होगी सुनवाई

विमान किराये में ‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’ रोकने के दिशानिर्देश संबंधी याचिका पर 13 जुलाई को होगी सुनवाई
Modified Date: July 12, 2026 / 01:24 pm IST
Published Date: July 12, 2026 1:24 pm IST

नयी दिल्ली, 12 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय निजी विमानन कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले किराये और अतिरिक्त शुल्क में ‘‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’’ पर नियंत्रण के लिए नियामक दिशानिर्देश बनाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर 13 जुलाई को सुनवाई करेगा।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में नागर विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्रियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत एवं स्वतंत्र नियामक बनाने का भी अनुरोध किया गया है।

शीर्ष अदालत ने 15 मई को कहा था कि विमान किराये को तर्कसंगत बनाए जाने की जरूरत है और उसने केंद्र सरकार से यात्रियों को राहत देने को कहा था। न्यायालय ने इस बात पर भी गौर किया था कि एक ही दिन, एक ही हवाई मार्ग पर उड़ान भरने वाली एक विमानन कंपनी एक निश्चित किराया वसूलती है जबकि दूसरी विमानन कंपनी अलग किराया वसूलती है।

केंद्र ने समस्या से इनकार नहीं करते हुए कहा है कि नया ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024’ जनवरी 2025 से लागू हो चुका है और उससे संबंधित नियमों पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया चल रही है।

लक्ष्मीनारायणन का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने दलील दी थी कि विमान अधिनियम, 1937 के तहत नियम पहले से मौजूद थे लेकिन समस्या यह है कि उनका पालन नहीं किया जाता।

शीर्ष अदालत ने पिछले वर्ष 17 नवंबर को लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर केंद्र और अन्य पक्षों से जवाब मांगा था।

इससे पहले केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया था कि नागर विमानन मंत्रालय याचिका में उठाए गए मुद्दों पर सक्रिय रूप से विचार कर रहा है।

शीर्ष अदालत ने 19 जनवरी को मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि वह विमान किराये में होने वाले ‘‘अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव’’ के मामले में हस्तक्षेप करेगी। न्यायालय ने त्योहारों के दौरान किराये में होने वाली भारी वृद्धि पर भी चिंता जताई थी।

शीर्ष अदालत ने विमानन कंपनियों द्वारा किराये में अत्यधिक वृद्धि को ‘‘यात्रियों का शोषण’’ करार दिया था और केंद्र एवं नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा था।

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन


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