फर्जी दवा नेटवर्क के खिलाफ समयबद्ध जांच, कड़ी कार्रवाई के लिए उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर
फर्जी दवा नेटवर्क के खिलाफ समयबद्ध जांच, कड़ी कार्रवाई के लिए उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर
नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) नकली और खराब गुणवत्ता वाली दवाओं, टीकों और कफ सिरप के निर्माण व बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध करते हुए उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई।
वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा मंगलवार को दायर इस याचिका में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ-साथ सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और विधि आयोग को पक्षकार बनाया गया है।
‘एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड’ अश्वनी कुमार दुबे के माध्यम से दायर इस याचिका में केंद्र और राज्यों को नकली दवाओं के मामलों में तीन महीने के भीतर जांच और एक साल के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में जब्ती, तलाशी और नमूने लेने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) बनाने, जब्त की गई दवाओं की समयबद्ध फॉरेंसिक जांच कराने और जांच कार्यवाही की अनिवार्य डिजिटल रिकॉर्डिंग व वीडियोग्राफी कराने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिका में बताया गया, “मिलावटी व नकली पेय और दवाओं के मामलों में कोई मानक जांच प्रक्रिया, समयबद्ध सुनवाई और सजा की नीति नहीं है। 1940 से औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम (ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट) लागू होने के बावजूद नकली दवाओं, सिरप, इंजेक्शन और टीकों की बिक्री व निर्माण लगातार बढ़ रहा है। मौजूदा ढांचे में एक बड़ी कमी है।”
इसके अलावा, याचिका में केंद्र और राज्यों को “तलाशी, जब्ती, नमूने लेने और इन्वेंट्री (सूचीकरण) की पूरी कार्यवाही की अनिवार्य रूप से डिजिटल रिकॉर्डिंग व वीडियोग्राफी करने” का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया।
याचिका में केंद्र को एक श्रेणीबद्ध सजा नीति तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है ताकि नकली दवा बनाने और बेचने वालों को सख्त सजा दिलाई जा सके।
याचिका में कहा गया, “भारतीय विधि आयोग को नकली दवाओं की रोकथाम के लिए मौजूदा कानूनों में आवश्यक बदलावों का सुझाव देते हुए एक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया जाए।”
याचिका में बताया गया कि नकली दवाओं का प्रचलन जनस्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा उत्पन्न करता है और अनुच्छेद 21 के तहत जीवन व स्वास्थ्य का अधिकार सहित नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।
भाषा जितेंद्र वैभव
वैभव

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