पिरेली कैलेंडर 2027 रहेगा भारत को सपर्मित, उसमें रघु राय की मूल कृतियों को मिलेगी जगह

पिरेली कैलेंडर 2027 रहेगा भारत को सपर्मित, उसमें रघु राय की मूल कृतियों को मिलेगी जगह

पिरेली कैलेंडर 2027 रहेगा भारत को सपर्मित, उसमें रघु राय की मूल कृतियों को मिलेगी जगह
Modified Date: May 5, 2026 / 05:49 pm IST
Published Date: May 5, 2026 5:49 pm IST

नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) पिरेली कैलेंडर 2027 में भारत को मुख्य विषय के रूप में दिखाया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध भारतीय फोटोग्राफर रघु राय और नॉर्वे के फोटोग्राफर सॉल्व सुंड्सबो की मौलिक कृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। पिरेली (कंपनी) ने यह घोषणा की।

कंपनी ने कहा कि राय ‘फोटोग्राफों की एक मौलिक श्रृंखला के माध्यम से’ इस परियोजना को विकसित करने के लिए पिछले तीन महीनों से लगे हुए थे ‘जो कैलेंडर के लिए उनकी विरासत और भारत के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाती है।’

‘द कैल’ नाम और ट्रेडमार्क वाला यह कैलेंडर राय की बेटी एवं प्रख्यात फोटोग्राफर अवनी राय की मदद से पूरा किया जाएगा, जिनकी कलाकृतियां आगामी संस्करण में भी प्रदर्शित होंगी ताकि ‘श्रृंखला के लिए उनके पिता के इरादों को साकार किया जा सके।’

अवनी राय ने एक बयान में कहा, ‘‘ मेरे पिता ने पिरेली के लिए जो काम किया, वह भारत को समर्पित था । उसमें भारत के लोगों और विविधता की समकालीन अभिव्यक्ति को साथ जोड़ा गया है जिससे वह हमेशा गहराई से आकर्षित रहे थे। मैं इसे अधूरा छोड़ने की कल्पना भी नहीं कर सकती।..’’

उन्होंने कहा, ‘‘..इसे आगे बढ़ाना मुझे उनके करीब रहने का, उनके एक अंश को अपने भीतर जीवित रखने का एक तरीका लगता है।’’

रघु राय का 26 अप्रैल को निधन हो गया । उन्होंने भारतीय आधुनिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं– 1972 का बांग्लादेश शरणार्थी संकट और 1984 की भोपाल गैस त्रासदी जुड़ी कुछ सबसे यादगार तस्वीरें खींची हैं।

उन्होंने इंदिरा गांधी, दलाई लामा, मदर टेरेसा, सत्यजीत रे, हरिप्रसाद चौरसिया और बिस्मिल्लाह खान जैसी प्रमुख हस्तियों के चित्रों में भारत के सामाजिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक पहलुओं को कैद किया।

सुंड्सबो ने 2026 के कैलेंडर की फोटोग्राफी की थी। वह आगामी संस्करण में भी अपना योगदान देंगे और अवनी राय के साथ मिलकर काम करेंगे।

उन्होंने कहा, “पिरेली कैलेंडर में दोबारा योगदान देने का निमंत्रण मिलना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। अवनी राय के साथ मिलकर ऐसा करना और उनके पिता की विरासत को श्रद्धांजलि देना मुझे बेहद खुशी दे रहा है।’’

भाषा राजकुमार मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में