प्रधानमंत्री बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे
प्रधानमंत्री बुद्ध से संबंधित पवित्र पिपरहवा अवशेषों की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे
नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को यहां पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इन अवशेषों की खोज 1898 में हुई थी और प्रारंभिक बौद्ध धर्म के पुरातात्विक अध्ययन में इनका अहम स्थान है।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ये अवशेष भगवान बुद्ध से सीधे तौर पर जुड़े सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण संग्रहों में से हैं।
इसमें कहा गया है कि पुरातात्विक साक्ष्य पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं, जिसे व्यापक रूप से उस स्थान के रूप में पहचाना जाता है जहां भगवान बुद्ध ने संन्यास लेने से पहले अपना प्रारंभिक जीवन व्यतीत किया था।
इस भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का नाम ‘द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन’ है। इसमें पहली बार एक साथ वे पिपरहवा अवशेष प्रदर्शित किए गए हैं, जिन्हें सौ साल से ज्यादा समय बाद भारत लाया गया है।
बयान में कहा गया है कि पिपरहवा अवशेष प्रारंभिक बौद्ध धर्म के पुरातात्विक अध्ययन में एक केंद्रीय स्थान रखते हैं।
इसके मुताबिक, इस प्रदर्शनी में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के साथ भारत के गहरे और निरंतर सभ्यतागत संबंध को रेखांकित किया गया है और यह भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सरकार के निरंतर प्रयासों, संस्थागत सहयोग और अभिनव सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम हाल में इन अवशेषों को स्वदेश लाया जा सका।
यह प्रदर्शनी विषयों के आधार पर आयोजित की गई है। इसके केंद्र में सांची स्तूप से प्रेरित एक पुनर्निर्मित व्याख्यात्मक मॉडल रखा गया है, जिसमें राष्ट्रीय संग्रहों में मौजूद असली अवशेषों और हाल में वापस लाए गए रत्नों को एक साथ प्रदर्शित किया गया है।
भाषा नोमान रंजन
रंजन

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