महिला आरक्षण अधिनियम की अधिसूचना पर सत्तापक्ष, विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप

महिला आरक्षण अधिनियम की अधिसूचना पर सत्तापक्ष, विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप

महिला आरक्षण अधिनियम की अधिसूचना पर सत्तापक्ष, विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप
Modified Date: April 17, 2026 / 04:13 pm IST
Published Date: April 17, 2026 4:13 pm IST

नयी दिल्ली, 17 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और विपक्षी पार्टियों ने शुक्रवार को एक-दूसरे पर महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया।

सत्ताधारी पार्टी ने इस कदम को “ऐतिहासिक” कदम बताया, जबकि विपक्ष ने कहा कि सरकार कानून पर अधिसूचना जारी करने को लेकर “सो रही” थी।

विपक्षी पार्टियों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण का इस्तेमाल “गैर-संवैधानिक” परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कर रही है।

महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 को बृहस्पतिवार रात को अधिसूचित किया गया।

एक अधिकारी ने बताया कि कानून को लागू करना ज़रूरी था क्योंकि इसके बिना इसका प्रस्तावित संशोधन लागू नहीं होता।

संविधान संशोधन विधेयक कानून तो बन गया लेकिन संविधान का हिस्सा नहीं बना क्योंकि सरकार ने इसे लागू नहीं किया था।

अधिकारी ने कहा कि अगर कोई कानून लागू नहीं होता है, तो उसमें प्रस्तावित संशोधन कैसे लागू किया जा सकता है, इसलिए इसे 16 अप्रैल से लागू किया गया।

साल 2023 में पारित अधिनियम को 16 अप्रैल से अधिसूचित किया गया था, जब लोकसभा में इसी कानून में संशोधन करने के लिए चर्चा चल रही है।

भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनका विरोध राजनीति से प्रेरित है।

उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, “विपक्ष का सिर्फ़ एक एजेंडा है — सिर्फ़ विरोध करना। इरादा सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विरोध करना है।”

उन्होंने कहा, “जहां तक परिसीमन की बात है, इसे साधारण बहुमत से पारित किया जा सकता है। यह उस तरह का संविधान संशोधन नहीं है जैसा बताया जा रहा है। विपक्ष अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन महिला आरक्षण पर उन्हें समर्थन करना चाहिए।’’

पार्टी सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने सरकार के इस कदम का बचाव किया और देरी या राजनीतिक मकसद के आरोपों को खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा, “विपक्ष या कुछ दक्षिणी राज्यों की देरी की दलीलें पूरी तरह गलत हैं।”

त्रिपाठी ने कहा, “जनगणना जैसे कारणों से इसे तुरंत लागू नहीं किया जा सकता। 2029 तक इसे लागू करने के लिए एक सही तरीका अपनाया किया गया है। इसमें कोई राजनीति नहीं है।”

कांग्रेस सांसद के सी वेणुगोपाल ने अधिसूचना जारी करने में देरी का मुद्दा उठाया और कहा कि यह ‘‘सरकार की ईमानदारी की कमी का सबूत’’ है।

वेणुगोपाल ने कहा, “महिला आरक्षण विधेयक 2023 में आम सहमति से पारित हुआ था, लेकिन इसे कल रात ही अधिसूचित किया गया। वे महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, लेकिन 2023 में पारित हुआ एक संविधान संशोधन अब लागू हुआ है।”

उन्होंने कहा, ‘‘कम से कम जब आप कोई संशोधन लाते हैं, तो यह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि उचित अधिसूचना जारी हो। आप किस कानून पर संशोधन ला रहे हैं?”

झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने भी सरकार के इस कदम के समय पर सवाल उठाया।

तृणमूल कांग्रेस नेता कीर्ति आज़ाद ने भी सरकार के तरीके की आलोचना की, और आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि उसे पता ही नहीं है कि वह क्या कर रही है।

भाषा वैभव हक

हक


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