तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर द्रमुक-अन्नाद्रमुक गठबंधन की संभावना निराधार : राजनीतिक विश्लेषक

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर द्रमुक-अन्नाद्रमुक गठबंधन की संभावना निराधार : राजनीतिक विश्लेषक

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर द्रमुक-अन्नाद्रमुक गठबंधन की संभावना निराधार : राजनीतिक विश्लेषक
Modified Date: May 7, 2026 / 12:45 pm IST
Published Date: May 7, 2026 12:45 pm IST

चेन्नई, सात मई (भाषा) तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक) के हाथ मिलाने संबंधी मीडिया में आईं अटकलों को राजनीतिक विश्लेषकों ने खारिज करते हुए इन्हें केवल ‘‘कयास’’ बताया है।

कुछ खबरों में दावा किया गया था कि अभिनेता-नेता विजय की तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के 108 विधायक होने के बावजूद द्रमुक और अन्नाद्रमुक मिलकर सरकार बना सकते हैं।

टीवीके प्रमुख विजय ने बुधवार को सरकार गठन का दावा पेश करने के लिए लोक भवन जाकर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की थी, लेकिन अब तक राज्यपाल ने पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया है।

पूर्व सांसद और अन्नाद्रमुक नेता पी के सी पालानीसामी ने कहा, ‘‘इसी वजह से कुछ मीडिया संस्थानों ने द्रमुक और अन्नाद्रमुक के साथ आने की अटकलें शुरू कर दीं। क्या आपको लगता है कि यह संभव है?’’

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि यदि दोनों दलों के बीच गठबंधन की कोई संभावना भी हो, तो मंत्री पदों के बंटवारे को लेकर गंभीर समस्याएं खड़ी होंगी।

पलानीसामी ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री कौन होगा, यह सबसे बड़ा सवाल होगा।’’ उन्होंने यह भी कहा कि दोनों दलों के कई नेता ऐसे गठबंधन को स्वीकार नहीं करेंगे।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सत्यालय रामकृष्णन ने कहा कि दोनों दलों के नेताओं के बीच किसी प्रकार की बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘फिर मीडिया में ऐसी खबरें कैसे फैल सकती हैं?’’

रामकृष्णन ने इन खबरों को ‘‘महज अटकल’’ बताते हुए कहा कि दोनों द्रविड़ दलों के एक साथ आकर सरकार बनाने की कोई संभावना नहीं है।

द्रमुक के वरिष्ठ नेता वी माधिवानन ने कहा, ‘‘हमारे वरिष्ठ नेता इसे स्वीकार नहीं करेंगे और किसी तरह के समझौते का कोई प्रयास नहीं हो रहा है।’’

उन्होंने कहा कि यदि गठबंधन की कोई संभावना होती, तो चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद दोनों दलों के वरिष्ठ नेता बातचीत शुरू कर चुके होते।

उन्होंने कहा कि चूंकि टीवीके सबसे बड़ा दल बनकर उभरा है, इसलिए राज्यपाल को विजय को सरकार बनाने और सदन में बहुमत साबित करने का अवसर देना चाहिए। उन्होंने इसे ‘‘संवैधानिक अधिकार’’ बताया।

भाषा मनीषा वैभव

वैभव


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