अय्यर, ईसाई और राजू समुदायों में अंतरजातीय विवाहों का अनुपात अधिक : तेलंगाना जाति सर्वेक्षण विश्लेषण
अय्यर, ईसाई और राजू समुदायों में अंतरजातीय विवाहों का अनुपात अधिक : तेलंगाना जाति सर्वेक्षण विश्लेषण
हैदराबाद, 17 अप्रैल (भाषा) तेलंगाना में कांग्रेस सरकार द्वारा 2024-25 में किए गए जातिगत सर्वेक्षण का विश्लेषण करने वाले एक विशेषज्ञ समूह ने पाया कि अंतरजातीय विवाह वाले परिवारों का सबसे बड़ा हिस्सा अयंगर/अय्यर समुदाय का है, उसके बाद बीसी/एससी ईसाई और राजू समुदाय का स्थान आता है।
हालांकि, उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी की अध्यक्षता वाले स्वतंत्र विशेषज्ञ कार्य समूह (आईईडब्ल्यूजी) ने कहा कि वेलामा और रेड्डी जैसे प्रभावशाली समूहों में अंतरजातीय विवाह की दर राज्य के औसत से काफी कम है।
सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि रेड्डी और वेलामा समेत बड़ी जमींदारी वाली अगड़ी जातियों में अंतरराजातीय शादियों की कम दरें बताती हैं कि सामाजिक-आर्थिक विशेषाधिकार के बावजूद, इन समूहों में जाति के आधार पर शादी की मज़बूत रूढ़ियां हैं। साथ ही यह इस बात का भी परिचायक है कि अगड़ी जातियों में समाज की सख्ती और खासकर शादी के फैसलों में महिलाओं की सीमित निजी राय होती है।
आईईडब्ल्यूजी ने कहा है कि अंतरजातीय विवाह सामाजिक रूढ़ियों के कमजोर होने का संकेत देते हैं और बढ़ती सामाजिक गतिशीलता का प्रतीक हैं, विशेष रूप से व्यक्तिगत स्वायत्तता के संदर्भ में, जिसमें महिलाएं अपने जीवनसाथी को चुनने में अधिक स्वतंत्रता हो रही हैं।
उसने कहा, ‘‘अंतरजातीय विवाह वाले परिवारों का सबसे बड़ा हिस्सा (12 प्रतिशत) अयंगर/अय्यर समुदाय से आता है, उसके बाद बीसी/एससी ईसाई (9.9 प्रतिशत) और राजू समुदाय (8.7 प्रतिशत) का स्थान आता है।’’
आईईडब्ल्यूजी ने कहा अंतरजातीय विवाहों का एक महत्वपूर्ण कारक शहरी निवास हो सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 90 प्रतिशत से अधिक ब्राह्मण शहरी क्षेत्रों में रहते हैं, जहां विवाह के मामले में जातिगत रूढ़ियां अधिक मायने नहीं रखती हैं।
दूसरी ओर, अनुसूचित जनजाति में शामिल कोलम (2.6 प्रतिशत), माली (2.6 प्रतिशत) और गोंड (2.8 प्रतिशत) जैसी जातियां अंतरजातीय विवाहों में सबसे कम हिस्सेदारी वाली जातियों में शामिल हैं।
भाषा शफीक नरेश
नरेश

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