महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधन देश भर की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब: मोदी
महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधन देश भर की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब: मोदी
नयी दिल्ली, नौ अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि महिला आरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश भर की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।
मोदी ने सभी सांसदों से इस महत्वपूर्ण संशोधन का समर्थन करने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने अपनी वेबसाइट ‘नरेन्द्र मोदी डॉट इन’ पर प्रकाशित एक लेख में यह भी कहा कि यह पहल उस सिद्धांत की पुष्टि है जिसने लंबे समय से भारत के इस सभ्यतागत लोकाचार का मार्गदर्शन किया है कि समाज तभी प्रगति करता है जब महिलाएं प्रगति करती हैं।
उन्होंने कहा कि अब जरूरत है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले समय में राज्यों के विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों के साथ कराए जाएं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश एक ऐतिहासिक अवसर की दहलीज पर खड़ा है और यह इसके लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने और समानता एवं समावेशन के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि इन्हीं प्रेरणादायी अवसरों के बीच, 16 अप्रैल को संसद की ऐतिहासिक बैठक होगी तथा विशेष सत्र महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा और उसे पारित करने के लिए बुलाया गया है।
प्रधानमंत्री ने बाद में पोस्ट किये गए एक वीडियो संदेश में, महिलाओं से उनके लेख को पढ़ने और अन्य को भी इसे पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि लोगों को राजनीतिक दलों को इस बात के लिए प्रोत्साहित और प्रेरित करना चाहिए कि 16, 17 और 18 अप्रैल को जब संसद की बैठक होगी तो वे इसे पारित करें।
उन्होंने कहा, ‘‘इसे सिर्फ एक विधायी प्रक्रिया कहना इसके महत्व को कम करके आंकना होगा। यह भारतवर्ष की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।’’
संसद के बजट सत्र की अवधि को बढ़ा दिया गया है और दोनों सदन का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है, जिसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन किया जाएगा, ताकि 2029 के आम चुनाव से इसका कार्यान्वयन हो सके। इस विधेयक को आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है।
इससे लोकसभा में सीट संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर 816 हो जाएगी, जिनमें से 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान 2023 में संविधान संशोधन के माध्यम से लाया गया था लेकिन यह 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रभावी होगा। इस तरह, अगर वर्तमान अधिनियम यथावत रहता है तो यह 2034 में लागू हो सकेगा। इसलिए, इसे 2029 के आम चुनाव से लागू करने के लिए इसमें संशोधन लाने की आवश्यकता पड़ी।
निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण प्रस्तावित 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाएगा।
राज्य विधानसभाओं के लिए भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जहां सीट का आरक्षण आनुपातिक आधार पर किया जाएगा।
आरक्षण ‘‘क्षैतिज आधार’’ पर प्रदान किया जाएगा तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को सीट आवंटित की जाएगी।
लेख में मोदी ने कहा, ‘‘हमारी नारी शक्ति देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है। आज देश के हर क्षेत्र में नारी शक्ति मिसाल बन रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से लेकर उद्यमशीलता तक, खेल के मैदान से लेकर सशस्त्र बलों तक और संगीत से लेकर कला के क्षेत्र में महिलाएं अपनी सशक्त पहचान बना रही हैं। हमारी माताएं-बहनें और बेटियां देश की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कई वर्षों से महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा तक बढ़ती पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय समावेशन में बढ़ोतरी और बुनियादी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच ने आर्थिक और सामाजिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती दी है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यह भी सच्चाई है कि इन सारे प्रयासों के बावजूद भी राजनीति और विधायी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व समाज में उनकी भूमिका के अनुरूप नहीं रहा है।’’
मोदी ने कहा कि यह विशेष रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं प्रशासन चलाने और प्रशासनिक निर्णयों में हिस्सा लेती हैं तो उनका अनुभव और दूरदृष्टि बहुत काम आती है, इससे चर्चा तो समृद्ध होती ही है, गुणवत्तापूर्ण शासन में सुधार भी होता है।
उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों में लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं को उनका उचित स्थान दिलाने के लिए बार-बार प्रयास हुए हैं। समितियां गठित की गईं, विधेयकों के मसौदे प्रस्तुत किए गए लेकिन वे कभी पारित नहीं हो सके।
उन्होंने कहा, ‘‘फिर भी, इस बात पर व्यापक सहमति रही है कि विधायी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरे जीवन के सबसे विशेष अवसरों में से एक रहा है। महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने का यह अवसर हमारे संविधान की मूल भावना के साथ गहराई से जुड़ा है। हमारे संविधान निर्माताओं ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां समानता न केवल संविधान में निहित हो, बल्कि उसे व्यवहार में भी लाया जाए।’’
मोदी ने कहा कि विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करना, उस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक ऐसे समाज के निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें राष्ट्र का भविष्य तय करने में प्रत्येक नागरिक की समान भूमिका हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अब इस निर्णय को और टाला नहीं जा सकता। दशकों से इसकी आवश्यकता को स्वीकार किया गया है। इस पर चर्चा हुई है, इसे बार-बार दोहराया गया है। महिलाओं के प्रतिनिधित्व को आगे बढ़ाने में किसी भी प्रकार की देरी हमारे लोकतंत्र की गुणवत्ता और समावेशिता को मजबूत करने में देरी है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद का यह ऐतिहासिक सत्र करीब आ चुका है, ‘‘मैं सभी दलों के सांसदों से हमारी नारीशक्ति के लिए इस महत्वपूर्ण कदम का समर्थन करने का आग्रह करता हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प के साथ इस दायित्व को पूरा करें। आइए, हम अपने लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।’’
मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा यह दिखाया है कि जब राष्ट्रीय महत्व के मामलों की बात आती है तो वह मतभेदों से ऊपर उठकर एकता के साथ कार्य कर सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह ऐसा ही एक क्षण है। आइए, हम सब मिलकर आगे बढ़ें और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करें तथा राष्ट्रीय प्रगति के लिए नारी शक्ति को सशक्त बनाएं।’’
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश

Facebook


