जनहित याचिकाओं का हथियार के तौर पर हो रहा इस्तेमाल : कलकत्ता उच्च न्यायालय
जनहित याचिकाओं का हथियार के तौर पर हो रहा इस्तेमाल : कलकत्ता उच्च न्यायालय
कोलकाता, एक सितंबर (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बांग्लादेशी कार्यकर्ता की हत्या के संबंध में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी की कथित टिप्पणी को लेकर दायर जनहित याचिका (पीआईएल) की विचारणीयता पर सवाल उठाते हुए मंगलवार को कहा कि जनहित याचिकाओं का इस्तेमाल ‘‘खास औजार या हथियार’’ के रूप में किया जा रहा है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति अतारुप बनर्जी की खंडपीठ ने पूछा कि इस याचिका को जनहित याचिका क्यों माना जाए।
अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि ध्यान आकर्षित करने के लिए ‘‘आजकल जनहित याचिकाओं का इस्तेमाल खास औजार या हथियार के रूप में किया जा रहा है।’’
खंडपीठ ने पूछा कि यह याचिका जनहित याचिका के रूप में सुनवाई योग्य कैसे है।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि बनर्जी ने दिसंबर 2025 में ढाका में बांग्लादेशी कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या को लेकर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं, जिनसे भारत के राष्ट्रीय हित पर असर पड़ा।
याचिकाकर्ता ने खंडपीठ के समक्ष दावा किया कि ये टिप्पणियां दो जून को कोलकाता में एक राजनीतिक रैली के दौरान की गई थीं।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शासकीय गोपनीयता अधिनियम का पालन करने के लिए बाध्य थीं।
बनर्जी की ओर से पेश वकील कल्याण बंदोपाध्याय और अर्क कुमार नाग ने खंडपीठ के समक्ष दावा किया कि याचिकाकर्ता यह नहीं बता सका कि शासकीय गोपनीयता अधिनियम के किस प्रावधान का उल्लंघन हुआ है।
राज्य की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि जांच में यह पुष्टि हुई है कि याचिकाकर्ता उस स्थान पर मौजूद नहीं था और वहां किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
याचिकाकर्ता के वकील ने अपने मुवक्किल से निर्देश लेने के लिए समय मांगा, जिसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई की अगली तारीख 14 सितंबर तय की।
भाषा जोहेब दिलीप
दिलीप

Facebook


