असम में बाढ़ को लेकर सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका स्वीकृत

असम में बाढ़ को लेकर सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका स्वीकृत

असम में बाढ़ को लेकर सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका स्वीकृत
Modified Date: August 26, 2026 / 07:33 pm IST
Published Date: August 26, 2026 7:33 pm IST

गुवाहाटी, 26 अगस्त (भाषा) गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता देबब्रत सैकिया की ओर से राज्य सरकार के खिलाफ दायर जनहित याचिका (पीआईएल) को स्वीकार कर लिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जुलाई में ऊपरी असम के कई जिलों में आई विनाशकारी बाढ़ के लिए सरकार की लापरवाही जिम्मेदार थी।

मुख्य न्यायाधीश आशुतोष कुमार ने याचिकाकर्ता के वकील के एन चौधरी की दलीलें सुनीं और सभी संबंधित पक्षों को तीन नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

याचिका के अनुसार, शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में आई बाढ़ में 105 लोगों की मौत हुई, लाखों लोग विस्थापित हुए और हजारों परिवारों की आजीविका नष्ट हो गई।

सैकिया ने आरोप लगाया कि यह बाढ़ कोई प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि ‘मानव निर्मित आपदा’ थी।

सैकिया ने कहा, “मैं 2018 से ही सरकार और अधिकारियों को आगाह करता रहा हूं। इससे पहले भी मैंने गुवाहाटी उच्च न्यायालय का दो बार रुख किया था और अदालत ने 2019 तथा फिर 2022 में डिकहो नदी के तटवर्ती क्षेत्र में अवैध खनन रोकने और टास्क फोर्स बटालियन गठित करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘सरकार ने उन आदेशों को नजरअंदाज कर दिया। यहां तक कि जल संसाधन विभाग की 12 जनवरी, 2022 की आधिकारिक रिपोर्ट में भी स्पष्ट रूप से अनुमान लगाया गया था कि लगातार अवैध खनन से नदी का मार्ग बदल जाएगा और तबाही होगी, जो अब सबसे दुखद तरीके से सच साबित हुआ है।’’

भाषा संतोष नरेश

नरेश


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