बीबीएमबी मामले में पंजाब आपसी सहमति से समाधान के करीब : केंद्र ने न्यायालय से कहा

बीबीएमबी मामले में पंजाब आपसी सहमति से समाधान के करीब : केंद्र ने न्यायालय से कहा

बीबीएमबी मामले में पंजाब आपसी सहमति से समाधान के करीब : केंद्र ने न्यायालय से कहा
Modified Date: August 12, 2026 / 01:37 pm IST
Published Date: August 12, 2026 1:37 pm IST

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) केंद्र सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय को जानकारी दी कि पंजाब सरकार, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) परियोजना से जुड़े हिमाचल प्रदेश के 1966 से बकाया भुगतान को लेकर उसके द्वारा पेश प्रस्ताव पर सहमति के बेहद करीब है।

केंद्र ने 30 जुलाई को शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि बकाया भुगतान के लिए सहयोगी राज्यों के बीच एक नए ‘नकदी रहित’ फॉर्मूले पर आपसी सहमति बन सकती है।

न्यायालय ने तब दर्ज किया था कि हिमाचल और हरियाणा की सरकारें केंद्र के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गई हैं, लेकिन पंजाब सरकार ने इस पर आपत्ति जताई है।

न्यायालय ने पंजाब सरकार को प्रस्ताव न मानने के लिए फटकार लगाई और कहा कि उसे अदालत के आदेशों का अनुपालन नहीं करने की आदत है।

हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने बुधवार को प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ से कहा कि शीर्ष अदालत ने इस मामले को इसलिए सूचीबद्ध किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पंजाब सरकार केंद्र के प्रस्ताव से सहमत है या नहीं।

केंद्र का पक्ष रखने के लिए पेश हुए अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने पीठ से कहा, ‘‘मुझे कहना होगा कि आज हम एक ही सुर में बात कर रहे हैं। पंजाब (सहमति के ) बहुत करीब आ रहा है।’’

उन्होंने पीठ से मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हम असहमतियों को दूर कर लेंगे।’’

इसके बाद पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त तक टाल दी।

सूत्रों के मुताबिक, बीबीएमबी एक नवंबर 2011 के बाद से भाखड़ा ब्यास परियोजना से हिमाचल प्रदेश के हिस्से की बिजली के लिए 7.19 प्रतिशत का भुगतान कर रहा है, जबकि पंजाब और हरियाणा ने बीबीएमबी परियोजना के पिछले बकाया का भुगतान नहीं किया है, जो 13,066 मिलियन यूनिट बिजली के बराबर है।

केंद्र के प्रस्ताव में कहा गया है कि चूंकि भुगतान के लिए बिजली की कीमत को लेकर पक्षकारों के बीच कोई सहमति नहीं बनी, इसलिए पंजाब और हरियाणा से हिमाचल को बिजली के रूप में भुगतान करने का सुझाव दिया गया है।

यह भी तय किया गया कि हिमाचल, पंजाब और हरियाणा को 420 करोड़ रुपये का बकाया नहीं देगा और यह रकम 13,066 मिलियन यूनिट बिजली से समायोजित की जाएगी।

केंद्र के प्रस्ताव के अनुसार, पंजाब और हरियाणा की ओर से हिमाचल को भुगतान नकद में नहीं, बल्कि 13,066 मिलियन यूनिट के बकाये में से 12,000 मिलियन यूनिट से अधिक बिजली देकर किया जाएगा।

वेंकटरमणी ने 30 जुलाई को पीठ से कहा था कि सरकार ने पूरी तरह से नकद रहित समाधान का प्रस्ताव किया है, क्योंकि अगर पक्षकार पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के हिसाब से आगे बढ़ते हैं तो मामले का समाधान नहीं हो पाएगा।

पंजाब सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता निदेश गुप्ता ने न्यायालय को बताया था कि उन्हें बकाया राशि के भुगतान की दर को लेकर समस्या है।

उन्होंने दलील दी थी कि बिजली की दर 2.5 रुपये प्रति यूनिट बहुत अधिक है और यह दर उचित होनी चाहिए, वरना राज्य को लगभग 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

पीठ ने गुप्ता से कहा कि अगर पंजाब आपसी समझौते के लिए सहमत नहीं होता है, तो न्यायालय मामले के गुण-दोष के आधार पर विचार करेगा और आदेश जारी करेगा।

भाषा धीरज सिम्मी

सिम्मी


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