पंजाब के डीआईजी की जमानत याचिका शत प्रतिशत खारिज होने योग्य है: न्यायालय
पंजाब के डीआईजी की जमानत याचिका शत प्रतिशत खारिज होने योग्य है: न्यायालय
नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा भ्रष्टाचार के एक मामले में पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार किए गए पंजाब पुलिस के निलंबित उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) हरचरण सिंह भुल्लर की दूसरी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि ‘‘यह याचिका शत प्रतिशत खारिज होने योग्य है।’’
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दी और संकेत दिया कि वह जमानत याचिका पर विचार करेगी।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यह याचिका तो 100 प्रतिशत खारिज होने योग्य है! आप इसे अभी खारिज कराना चाहते हैं या बाद में?’’
भुल्लर के वकील ने दलील दी कि शिकायतकर्ता और कुछ महत्वपूर्ण गवाहों से अभी तक सवाल-जवाब नहीं किए गए हैं, जबकि कुछ अन्य के बयान दर्ज किए जा चुके हैं।
भुल्लर ने 10 अगस्त को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है।
इससे पहले 10 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने मामले में उनकी जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, न्यायालय ने भुल्लर को यह छूट दी थी कि यदि दो महीने के भीतर मामले की सुनवाई शुरू नहीं होती है तो वह जमानत के लिए उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।
पिछले साल अक्टूबर में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रोपड़ रेंज के डीआईजी पद पर तैनात रहे भुल्लर ने सरहिंद थाने में दर्ज एक प्राथमिकी के संबंध में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए एक बिचौलिए के जरिए कथित तौर पर रिश्वत मांगी थी।
इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पिछले साल 16 अक्टूबर को चंडीगढ़ में जाल बिछाया गया था जहां एक सह-अभियुक्त को मांगी गई रिश्वत की रकम के हिस्से के रूप में कथित तौर पर पांच लाख रुपये लेते पकड़ा गया था।
इसी मामले में भुल्लर को गिरफ्तार किया गया। बाद में जनवरी में चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
भाषा खारी वैभव
वैभव

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