कचरा प्रबंधन के नए नियमों का पालन न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी: एनडीएमसी

कचरा प्रबंधन के नए नियमों का पालन न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी: एनडीएमसी

कचरा प्रबंधन के नए नियमों का पालन न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी: एनडीएमसी
Modified Date: September 15, 2026 / 01:24 pm IST
Published Date: September 15, 2026 1:24 pm IST

नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार द्विवेदी ने कहा कि कचरा प्रबंधन के नए नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ ‘‘कतई बर्दाश्त नहीं करने’’ की नीति अपनाई जाएगी।

द्विवेदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हमें उन संस्थानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जिनसे बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। नियमों का उल्लंघन कतई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। संस्थान जितना बड़ा होगा, उसे नियमों के पालन के प्रति उतना ही अधिक जागरूक होना चाहिए।’’

एनडीएमसी ने ऐसे संस्थानों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत तय की गई परिभाषा का विवरण भी साझा किया है।

नए नियमों के अनुसार, 20,000 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाला ऐसा संस्थान, जहां प्रतिदिन 40,000 लीटर या उससे अधिक पानी की खपत होती हो अथवा प्रतिदिन 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा निकलता हो, बीडब्ल्यूजी (जिनसे बड़ी मात्रा में कचरा निकलता हो) की श्रेणी में आ सकता है।

इन मानदंडों के दायरे में होटल, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, मॉल, औद्योगिक इकाइयां, छात्रावास और आवासीय सोसाइटियों समेत कई तरह के संस्थागत, व्यावसायिक और आवासीय प्रतिष्ठान आते हैं।

अधिकारियों के अनुसार, एक अप्रैल से लागू हुई नयी व्यवस्था में बीडब्ल्यूजी की जिम्मेदारी बढ़ा दी गई है। इसके तहत उन्हें अपने परिसर से निकलने वाले कचरे का प्रबंधन स्वयं करना होगा और नगर निकाय की कचरा संग्रहण एवं निपटान व्यवस्था पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना होगा।

इनके लिए कचरे को उसके स्रोत पर ही चार श्रेणियों गीला, सूखा, स्वच्छता संबंधी और विशेष प्रबंध वाले कचरे में अलग करना अनिवार्य है। इसके बाद उन्हें इन श्रेणियों के अनुसार कचरा बीनने वालों, संग्राहकों या पुनर्चक्रणकर्ताओं को अलग-अलग सौंपना होगा।

अधिकारियों ने बताया कि बीडब्ल्यूजी के लिए अपने कचरे का पर्यावरण अनुकूल प्रसंस्करण और निपटान करना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि नियमों के प्रावधानों का पालन नहीं करने पर ‘प्रदूषक भुगतान’ सिद्धांत के आधार पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी। इसमें अनिवार्य पंजीकरण के बिना काम करना, गलत जानकारी या जाली दस्तावेज जमा करना तथा कचरे के संग्रह, कचरे को अलग करना, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान में नियमों का उल्लंघन करना शामिल है।

इसके अलावा, संशोधित पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत 10,000 रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन 10,000 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

अधिकारियों के मुताबिक, एनडीएमसी क्षेत्र में लगभग 700 से 800 बीडब्ल्यूजी की पहचान की गई है।

भाषा खारी वैभव

वैभव


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