पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा ने याचिका दायर करके अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी

पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा ने याचिका दायर करके अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी

पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा ने याचिका दायर करके अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी
Modified Date: May 12, 2026 / 10:10 pm IST
Published Date: May 12, 2026 10:10 pm IST

चंडीगढ़, 12 मई (भाषा) पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत प्रवर्तन निदेशालय द्वारा अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में मंगलवार को एक याचिका दायर की।

अरोड़ा ने अपनी याचिका में अपनी गिरफ्तारी को ‘अवैध और असंवैधानिक’ बताया है। अरोड़ा की याचिका मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की पीठ के समक्ष आई, जिसने अरोड़ा के वकील पुनीत बाली की दलीलें सुनीं और मामले की सुनवायी 14 मई को निर्धारित की।

ईडी ने नौ मई को पंजाब के उद्योग मंत्री अरोड़ा को कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये के जीएसटी धोखाधड़ी से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया था, जिसमें उनसे जुड़ी कुछ इकाइयां शामिल हैं।

अरोड़ा (62) को चंडीगढ़ के सेक्टर 2 स्थित उनके आधिकारिक आवास पर छापेमारी के बाद पीएमएलए के तहत हिरासत में लिया गया।

अरोड़ा ने अपनी याचिका में, गुरुग्राम की विशेष अदालत द्वारा 9 मई को पारित हिरासत आदेश को रद्द करने का निर्देश देने का अनुरोध किया, जिसके तहत उन्हें 16 मई तक ईडी की हिरासत में भेजा गया था।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि उनकी गिरफ्तारी ‘अवैध और असंवैधानिक’ है, क्योंकि यह पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तारी को नियंत्रित करने वाले अनिवार्य वैधानिक सुरक्षा उपायों और संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 के तहत गारंटीकृत संवैधानिक सुरक्षा का ‘पूर्ण उल्लंघन’ थी।

वरिष्ठ वकील पुनीत बाली और अरोड़ा का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता विभव जैन और विरेन सिबल ने बताया कि अरोड़ा हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड के प्रमोटर और पूर्व अध्यक्ष हैं, जिसे पहले रितेश प्रॉपर्टीज एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड के नाम से जाना जाता था।

याचिकाकर्ता वर्तमान में पंजाब सरकार में उद्योग और वाणिज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं और इससे पहले 2022 से 2025 तक राज्यसभा के सदस्य के रूप में कार्य कर चुके हैं।

सार्वजनिक पद पर निर्वाचित होने के बाद, याचिकाकर्ता ने एचएसआरएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया और उक्त कंपनी के दिन-प्रतिदिन के संचालन, प्रबंधन या व्यावसायिक मामलों में उनकी कोई भागीदारी नहीं रही है।

भाषा अमित माधव

माधव


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