नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बृहस्पतिवार को बताया कि उसने घर खरीदारों से ‘धोखाधड़ी’ से जुड़े धन शोधन के मामले में गुरुग्राम की एक रियल एस्टेट कंपनी के प्रवर्तकों के विभिन्न परिसर पर छापेमारी के बाद 33 करोड़ रुपये की संपत्तियों के उपयोग और हस्तांतरण पर रोक लगाने की कार्रवाई की।
केन्द्रीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि दिल्ली-एनसीआर में ‘वाटिका लिमिटेड’ के प्रवर्तकों और निदेशकों से जुड़े सात आवासीय और आधिकारिक परिसरों पर छापेमारी की कार्रवाई की गई।
एजेंसी ने बताया कि छापों के दौरान दस्तावेज बरामद करने के अलावा तीन महंगी गाड़ियां, आभूषण, प्रतिभूतियां जब्त की तथा बैंक खाते से लेन-देन पर रोक लगा दी।
ईडी ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज कई प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत यह मामला दर्ज किया था।
ईओडब्ल्यू ने धोखाधड़ी से लुभाने, आवासीय प्लॉट न देने और अन्य संबंधित अपराधों के आरोपों में कंपनी के प्रवर्तकों अनिल भल्ला, गौतम भल्ला और गौरव भल्ला तथा अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
ईडी के अनुसार, ‘वाटिका इंडिया नेक्स्ट’ और ‘वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2’ जैसी परियोजनाओं से जुड़े लेन-देन में प्रथम दृष्टया एक ही जैसा तरीका सामने आया है, जहां शिकायतकर्ताओं से आवासीय भूखंड के आवंटन और बिक्री के नाम पर पहले ही बड़ी रकम वसूल ली गई थी। हालांकि, कई बार समय-सीमा बीत जाने के बाद भी वादे के मुताबिक अधिकांश भूखंडों पर कब्जा नहीं दिया गया।
एजेंसी ने बताया कि 2010 से 2012 के बीच पीड़ित पक्षों से लगभग 260.30 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे और 120 करोड़ रुपये के भूखंड दिए गए थे।
ईडी ने आरोप लगाया, ‘‘पीड़ित पक्षों द्वारा कई बार प्रयास किए जाने के बावजूद 14 साल बीत जाने के बाद भी शेष भूखंड पर कब्जा नहीं दिया गया।’’
एजेंसी ने दावा किया कि इन्हीं परियोजनाओं में आरोपियों ने पीड़ित कंपनी से सहमति लिए बिना तीसरे पक्षों को ‘गुप्त रूप से’ 14 भूखंड बेच दिए।
भाषा सुमित संतोष
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