राजस्थान : फर्जी फॉर्म-7 के मुद्दे को लेकर विधानसभा में हंगामा

राजस्थान : फर्जी फॉर्म-7 के मुद्दे को लेकर विधानसभा में हंगामा

राजस्थान : फर्जी फॉर्म-7 के मुद्दे को लेकर विधानसभा में हंगामा
Modified Date: January 30, 2026 / 03:42 pm IST
Published Date: January 30, 2026 3:42 pm IST

जयपुर, 30 जनवरी (भाषा) राजस्थान में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर बड़ी संख्या में फर्जी फार्म-7 दिए जाने के मुद्दे को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में हंगामा हुआ, जिसके कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

शून्यकाल में कांग्रेस के विधायक ने इस मुद्दे को उठाना चाहा तो संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने इस पर एतराज जताया। मंत्री के अनुसार यह राज्य अथवा राज्य सरकार से संबंधित विषय नहीं है इसलिए इस पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए तथा हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

बाद में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि वह इस मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने के बारे में विधि विशेषज्ञों की राय के बाद फैसला लेंगे।

कांग्रेस के विधायक जाकिर हुसैन गैसावत ने मकराना विधानसभा क्षेत्र में 14 से 19 दिसंबर के बीच प्राप्त फर्जी फॉर्म-7 की जांच करने व धरने के बावजूद सूची छिपाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करने का मुद्दा पर्ची के जरिए उठाना चाहा।

जैसे ही हुसैन ने बोलना शुरू किया संसदीय कार्य मंत्री मंत्री जोगाराम पटेल ने आपत्ति जताई। पटेल ने कहा कि विधायक ने पर्ची के जरिए उठाने के लिए जो विषय रखा है वह विषय नियमों व कायदे से यहां रखा ही नहीं जा सकता, क्योंकि यह न तो राजस्थान सरकार का विषय है न ही राजस्थान सरकार से जुड़ा कोई विषय है।

पटेल ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-324 के तहत निर्वाचक नामावली से जुड़े काम निर्वाचन आयोग के अधीन आते हैं। मतदाता सूची बनाना, उसमें संशोधन, नाम जोड़ना या काटना ये सारे अधिकार निर्वाचन आयोग के पास है।

संसदीय कार्य मंत्री ने इस संबंध में अन्य नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि यह राज्य सरकार की विषय वस्तु में नहीं आता है, और जो विषय राज्य सरकार का है ही नहीं उसे किसी भी तरह से विधानसभा में उठाया नहीं जा सकता।

इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि जब मामला पर्ची के माध्यम से उठ गया है और सदन के अध्यक्ष की अनुमति से उठ गया तो संसदीय मंत्री कौन से नियमों की बात कर रहे हैं।

जूली ने कहा, ”हम तो पर्ची के माध्यम से यह पूछ रहे हैं कि जो आवेदन आए वे कहां से आए और उसकी जांच होगी या नहीं। हम तो चाहते हैं कि सरकार उसकी जांच करवा ले।”

इसको लेकर संसदीय कार्य मंत्री व नेता प्रतिपक्ष में तीखी नोक-झोंक हुई। मंत्री ने कहा कि इस विषय को यहां नहीं उठाया जा सकता। जूली ने इस मामले की जांच करवाने की मांग की। दोनों ओर के विधायक बोलने लगे तो विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही भोजनावकाश से पांच मिनट पहले दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

बाद में जब सदन की बैठक शुरू हुई तो जूली ने अध्यक्ष देवनानी से आग्रह किया कि चुनाव सुधारों के मुद्दे पर लोकसभा में हाल ही में चर्चा हुई है तथा उसके अनुसार यहां आधे घंटे की चर्चा करवाई जा सकती है।

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि ऐसी चर्चा नियमों के अनुसार इस सदन में नहीं हो सकती।

अध्यक्ष देवनानी ने कहा,” मैं विधि विशेषज्ञों व संसदीय सचिवालय से चर्चा कर इस पर निर्णय करूंगा।”

इसके बाद सदन में आगे की नियमित कार्यवाही हुई।

भाषा

पृथ्वी

रवि कांत


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