राजस्थान: अदालत ने संशोधित ट्रांसजेंडर कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

राजस्थान: अदालत ने संशोधित ट्रांसजेंडर कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा

राजस्थान: अदालत ने संशोधित ट्रांसजेंडर कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
Modified Date: April 22, 2026 / 04:46 pm IST
Published Date: April 22, 2026 4:46 pm IST

जयपुर, 22 अप्रैल (भाषा) राजस्थान उच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2026 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब तलब किया है। याचिका में दावा किया गया है कि ये प्रावधान इस समुदाय के हितों के विपरीत हैं।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति शुभा मेहता की पीठ ने मंगलवार को गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘नई भोर संस्था’ द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता सचिव तथा केन्द्रीय विधि सचिव को नोटिस जारी किया।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि 2019 के अधिनियम में हाल ही में किए गए संशोधनों ने ऐसे प्रतिगामी प्रावधान सामने आए हैं जो ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के मौलिक अधिकारों, स्वायत्तता और गरिमा को कमजोर करते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने उन प्रावधानों को भी चुनौती दी जिनके तहत नए अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। आशंका जताई गई है कि इन अपराधों की परिभाषा अस्पष्ट है और इनका दुरुपयोग हो सकता है।

याचिका के अनुसार 2026 का संशोधन यह अनिवार्य करता है कि लिंग पहचान प्रमाण पत्र जारी करने से पहले मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की अध्यक्षता वाले एक मेडिकल बोर्ड द्वारा शारीरिक परीक्षण किया जाए और उसके बाद मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट सौंपी जाए।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि ये अनिवार्यता ‘चिकित्सा पहरेदारी’ जैसी हैं और ये निजता के अधिकार तथा व्यक्तिगत स्वायत्तता का ‘उल्लंघन’ करती हैं।

उच्च न्यायालय ने संशोधित प्रावधानों की संवैधानिक वैधता के संबंध में केंद्र सरकार से औपचारिक जवाब मांगा है।

ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026 को संसद ने 25 मार्च को पारित किया था और 30 मार्च को इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई थी।

भाषा पृथ्वी

धीरज

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