राजस्थान उच्च न्यायालय ने जवाई तेंदुआ अभयारण्य में निर्माण व अनियंत्रित पर्यटन पर लगाई रोक
राजस्थान उच्च न्यायालय ने जवाई तेंदुआ अभयारण्य में निर्माण व अनियंत्रित पर्यटन पर लगाई रोक
जोधपुर, 30 अप्रैल (भाषा) राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश में पाली जिले के सुमेरपुर के निकट स्थित जवाई तेंदुआ अभयारण्य में निर्माण, खनन और अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाते हुए कहा है कि तेंदुओं के आवास में हस्तक्षेप संवैधानिक दायित्वों का उल्लंघन है।
अदालत ने राज्य सरकार को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा आठ और 18 के तहत जवाई क्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करने की व्यवहार्यता पर विचार करने का निर्देश भी दिया, जिससे इस क्षेत्र के संरक्षण स्तर को बढ़ाने की संभावना जताई गई है।
न्यायमूर्ति पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति संदीप शाह की खंडपीठ ने कहा कि “पृथ्वी मनुष्य की नहीं है, बल्कि मनुष्य पृथ्वी का है” और पर्यावरण संरक्षण केवल नीतिगत विषय नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार से जुड़ा संवैधानिक दायित्व है।
अदालत ने जवाई क्षेत्र में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए नए पर्यटन लाइसेंस पर पूर्ण प्रतिबंध, खनन गतिविधियों पर रोक के साथ साथ कंटीले तार की बाड़ लगाने पर भी प्रतिबंध लगाया है। साथ ही, अदालत की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी निर्माण कार्य पर रोक लगाई गई है।
पीठ ने कहा कि तेंदुआ अभयारण्य में नाइट सफारी पर पहले से लगी रोक जारी रहेगी।
अदालत ने सफारी संचालन, पर्यटन गतिविधियों और आवास संरक्षण के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के मसौदे को तत्काल लागू करने का निर्देश भी दिया और कहा कि यह विशेषज्ञों द्वारा तैयार ढांचा पारिस्थितिकी तंत्र को और क्षति से बचाने के लिए आवश्यक है।
इसके अलावा, ‘जवाई सफारी एवं इको-टूरिज्म समन्वय समिति’ नामक बहु-विभागीय निकाय को तत्काल प्रभाव से कार्य शुरू करने का निर्देश दिया गया है, ताकि विभिन्न प्राधिकरणों के बीच समन्वय और अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
यह निर्देश जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसमें जवाई क्षेत्र में अनियंत्रित इको-पर्यटन, अवैध निर्माण और खनन के कारण तेंदुओं के संवेदनशील आवास पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव को उजागर किया गया था।
अदालत ने कहा कि लगभग 50 से 70 तेंदुओं का निवास यह क्षेत्र मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व का एक दुर्लभ उदाहरण है, जो बढ़ते मानवीय दबाव के कारण खतरे में है।
अदालत ने यह भी कहा कि अनधिकृत निर्माण या अनियंत्रित पर्यटन गतिविधियों के माध्यम से तेंदुओं के आवास में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप संवैधानिक दायित्वों का उल्लंघन है।
मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी और तब तक राज्य तथा केंद्र सरकार को अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
भाषा मनीषा सुरभि
सुरभि

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