राजस्थान:भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे क्षेत्रों में अवैध धार्मिक ढांचों को ढहाने के खिलाफ प्रदर्शन
राजस्थान:भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे क्षेत्रों में अवैध धार्मिक ढांचों को ढहाने के खिलाफ प्रदर्शन
जयपुर, छह जुलाई (भाषा) राजस्थान में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट कथित अवैध धार्मिक ढांचों को ध्वस्त किए जाने की कार्रवाई के बाद बाड़मेर और बीकानेर जिलों में विरोध-प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर उचित प्रक्रिया का पालन नहीं करने और चुनिंदा तरीके से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका के अनुसार, 18 से 20 जून के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित कई गांवों में करीब 12 मस्जिदों को ध्वस्त किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, इन ढांचों को गोचर भूमि पर अतिक्रमण बताते हुए हटाया गया। यह कार्रवाई सीमा क्षेत्र में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देशों के तहत की गई।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 27 मई को अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर के दायरे में अवैध निर्माणों के खिलाफ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करने की नीति लागू करते हुए उन्हें हटाने के निर्देश दिए थे।
हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि ध्वस्तीकरण अभियान शुरू होने से कुछ समय पहले ही नोटिस दिए गए, जिससे जवाब देने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
सियाई गांव के निवासी अब्दुल सिंधी ने कहा, ‘‘कम से कम हमें पहले चेतावनी तो दी जानी चाहिए थी। हम नियमों का पालन कर लेते या जुर्माना भर देते।’’
बाड़मेर के केरकोरी गांव में ध्वस्त की गई एक मस्जिद के स्थानीय मौलवी हिशामुद्दीन सिंधी ने कहा कि यह मस्जिद कई दशकों से उपयोग में थी।
उन्होंने कहा, ‘‘इसे हमने बड़ी मुश्किल से बनाया था। 10 किलोमीटर के दायरे में यही एकमात्र मस्जिद थी। अब लोग नमाज पढ़ने के लिए कहां जाएंगे?’’
इन घटनाओं के विरोध में बाड़मेर के कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन हुए। ‘सर्व धर्म शांति सभा’ के बैनर तले हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों ने संयुक्त रूप से मार्च निकाला और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
सामुदायिक सौहार्द का उदाहरण पेश करते हुए स्थानीय निवासी हरला राम मेघवाल ने कहा, ‘‘हम अपने मुस्लिम भाइयों के साथ खड़े रहे। जब उन्होंने विरोध स्वरूप खाना बनाना बंद कर दिया तो हमारे समाज के लोगों ने उन्हें भोजन उपलब्ध कराया।’’
कुछ ग्रामीणों ने कार्रवाई की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए। परड़िया के सरपंच सोरता राम मेघवाल ने कहा, ‘‘यदि सरकार अतिक्रमण हटाना चाहती है तो सभी अवैध निर्माणों पर समान कार्रवाई होनी चाहिए। कार्रवाई पक्षपातपूर्ण नहीं दिखनी चाहिए।’’
मामला अब राजस्थान उच्च न्यायालय में पहुंच गया है, जहां याचिकाकर्ताओं ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए तोड़फोड़ की कार्रवाई को चुनौती दी है।
राज्य सरकार ने अपने पक्ष में कहा है कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और सीमा क्षेत्र में किसी भी निर्माण के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य है।
उच्च न्यायालय इस मामले में अगली सुनवाई सात जुलाई को करेगा।
इस बीच, विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
वहीं, सत्तारूढ़ दल के प्रतिनिधियों का कहना है कि कार्रवाई केवल अवैध अतिक्रमण के खिलाफ की गई है, किसी धर्म विशेष को निशाना नहीं बनाया गया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सीमा क्षेत्रों में धार्मिक ढांचों को ढहाए जाने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी कार्रवाइयों का सांप्रदायिक शांति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है और इस पर संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए।’’
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने हाल ही में बीकानेर में भी विरोध-प्रदर्शन किया था।
वहीं, जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
भाषा बाकोलिया
रंजन संतोष
संतोष

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