राजस्थान: एक भैंस और उसके पाड़े पर दो लोगों ने दावा किया, चिकित्सा रिपोर्ट से सुलझा विवाद

राजस्थान: एक भैंस और उसके पाड़े पर दो लोगों ने दावा किया, चिकित्सा रिपोर्ट से सुलझा विवाद

राजस्थान: एक भैंस और उसके पाड़े पर दो लोगों ने दावा किया, चिकित्सा रिपोर्ट से सुलझा विवाद
Modified Date: January 4, 2026 / 05:38 pm IST
Published Date: January 4, 2026 5:38 pm IST

कोटा (राजस्थान), चार जनवरी (भाषा) कोटा में अधिकारियों को एक अनोखी स्थिति का सामना करना पड़ा जब दो व्यक्तियों ने एक ही भैंस और उसके पाड़े (भैंस का बच्चा) पर अपना दावा जताया, और स्थिति का समाधान तब हो सका जब एक चिकित्सा बोर्ड का गठन किया गया और मवेशियों को जांच के लिए पशु चिकित्सालय ले जाया गया।

पुलिस के अनुसार, नारायण विहार निवासी राम लाल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी भैंस और पाड़ा लगभग एक महीने पहले गायब हो गए थे। वे लगातार उनकी तलाश कर रहे थे तभी दो दिन पहले उन्होंने जानवरों को उसी इलाके के रामचंद्रपुरा मार्गिया बस्ती में इंद्रजीत केवट के बाड़े में बंधा हुआ देखा।

लाल ने तुरंत केवट से संपर्क किया और दावा किया कि वे मवेशी उसके हैं।

 ⁠

इंद्रजीत ने हालांकि इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि उसने भैंस को दो साल पहले बाड़ी गांव से खरीदा था और मवेशी की उम्र लगभग सात साल है।

विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्ष शनिवार को कुन्हाड़ी पुलिस थाने पहुंचे।

कुन्हाड़ी की वृत्ताधिकारी कौशल्या ने रविवार को बताया, ‘‘प्रारंभिक जांच में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए और स्वामित्व साबित करने का प्रयास किया। राम लाल का दावा था कि भैंस लगभग चार से पांच वर्ष की थी और उसने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया था, जबकि इंद्रजीत का कहना था कि मवेशी लगभग सात वर्ष का है।’’

उन्होंने कहा कि चूंकि विवाद आपसी सहमति से हल नहीं हो सका, इसलिए पुलिस ने पशु चिकित्सक की राय लेने का निर्णय लिया। पशु चिकित्सा समिति का गठन किया गया और भैंस को जांच के लिए कोटा के मोखापाड़ा क्षेत्र में स्थित एक सरकारी पशु चिकित्सालय ले जाया गया।

उन्होंने बताया कि जानवरों के दांतों और शारीरिक स्थिति की जांच करने के बाद, पशु चिकित्सकों ने निष्कर्ष निकाला कि भैंस की उम्र लगभग चार से पांच वर्ष थी, न कि सात वर्ष जैसा कि इंद्रजीत ने दावा किया था।

कौशल्या ने बताया कि चिकित्सा रिपोर्ट और सहायक सबूतों के आधार पर पुलिस ने लाल के दावे की पुष्टि की तथा शनिवार देर शाम भैंस और उसके पाड़े को लाल को सौंप दिया।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि दूसरे दावेदार, इंद्रजीत हालांकि इस फैसले से संतुष्ट नहीं थे, जिसके बाद उनसे सबूत पेश करने को कहा गया, लेकिन वह ऐसा करने में विफल रहे।

भाषा प्रशांत शफीक

शफीक


लेखक के बारे में