रक्षाबंधन सम्मान और पारस्परिक जिम्मेदारी की भावना का प्रतीक: राष्ट्रपति मुर्मू

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रक्षाबंधन सम्मान और पारस्परिक जिम्मेदारी की भावना का प्रतीक: राष्ट्रपति मुर्मू

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  • Publish Date - August 27, 2026 / 08:43 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 08:43 PM IST

(फाइल फोटो के साथ जारी)

नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार को रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह त्योहार न केवल भाई-बहन के बीच, बल्कि परिवार, मित्रों और समाज में भी सम्मान एवं पारस्परिक जिम्मेदारी की भावना का प्रतीक है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संदेश में कहा, ‘‘यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि हर रिश्ता विश्वास, संवेदनशीलता और आपसी सहयोग के स्तंभों पर टिका होता है।’’

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का त्योहार प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग रहा है।

मुर्मू ने कहा, ‘‘कई श्लोकों और मंत्रों में हमें ‘रक्षे मा चल, मा चल’ शब्द मिलते हैं। इन शब्दों में यह प्रार्थना निहित है कि ‘रक्षा का यह बंधन हमेशा बना रहे।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि रक्षाबंधन एक सामाजिक त्योहार के रूप में लोकप्रिय हुआ है जिसमें बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह न केवल भाई-बहन के बीच, बल्कि परिवार के सदस्यों, परिवारों, मित्रों और समाज में भी स्नेह, सम्मान और पारस्परिक जिम्मेदारी की भावना का प्रतीक है।’’

राष्ट्रपति मुर्मू ने देशवासियों से ‘‘अपने परिवारों और समुदायों के बीच संबंधों को और मजबूत करने’’ का संकल्प लेने का भी आह्वान किया।

उन्होंने देश और विदेश में रहने वाले सभी भारतीयों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा, ‘‘आइए, इसी भावना के साथ विकसित भारत की ओर आगे बढ़ें।’’

भाषा सिम्मी नरेश

नरेश