जेएसडब्ल्यू धरमतर बंदरगाह की कार्गो क्षमता बढ़ाने के लिए पर्यावरण मंजूरी की सिफारिश
जेएसडब्ल्यू धरमतर बंदरगाह की कार्गो क्षमता बढ़ाने के लिए पर्यावरण मंजूरी की सिफारिश
नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) पर्यावरण मंत्रालय द्वारा गठित एक उप-समिति ने महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में जेएसडब्ल्यू धरमतर बंदरगाह की जेटी सुविधा के भ्रमण के बाद कोयले के रिसाव के कारण नदी के जल में गंदगी बढ़ने जैसे जोखिमों की ओर इशारा किया है।
रायगढ़ जिले के डॉल्वी गांव में धरमतर क्रीक के किनारे स्थित जेटी सुविधा का इस्तेमाल पास में स्थित जेएसडब्ल्यू डॉल्वी इस्पात संयंत्र तक माल ढुलाई के लिए किया जाता है।
उप-समिति ने भ्रमण के बाद कहा है कि क्षेत्र में दलदली वनों (मैंग्रोव) पर कोयले/लौह अयस्क की धूल जमी हुई है, इलाके में गंदा पानी छोड़ा जा रहा है, और कोयला गिरने से नदी के पानी में गंदगी बढ़ने का खतरा है।
यह दौरा मंत्रालय के एक विशेषज्ञ पैनल द्वारा पर्यावरण मंजूरी (ईसी) और तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) मंजूरी देने की सिफारिश करने से पहले हुआ था। यह मंजूरी कार्गो की माल ढुलाई क्षमता को 3.39 करोड़ टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 5.4 करोड़ टन प्रतिवर्ष करने के लिए मांगी गई थी।
पिछले महीने हुई एक बैठक के विवरण के अनुसार, जेएसडब्ल्यू धरमतर पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड ने इन समस्याओं को स्वीकार किया है और उनसे निपटने के लिए उप-समिति की सिफारिशों का पालन करने पर सहमति जताई है। इस समिति को विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (ईएसी) के नाम से जाना जाता है।
भाषा वैभव सुरेश
सुरेश

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