किसी व्यक्ति के धार्मिक अधिकार लोक व्यवस्था के अधीन : न्यायालय
किसी व्यक्ति के धार्मिक अधिकार लोक व्यवस्था के अधीन : न्यायालय
नयी दिल्ली, 12 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के धार्मिक अधिकार ‘‘लोक व्यवस्था’ के अधीन हैं और इसके साथ न्यायालय ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें एक व्यक्ति ने अपने बेटे के शव को कब्र से निकालने का अनुरोध किया था।
याचिका के अनुसार उस व्यक्ति के बेटे को आतंकवादी बताया गया था और उसकी नवंबर 2021 में कश्मीर में एक मुठभेड़ में मौत हो गई थी। व्यक्ति ने अपने बेटे के शव को कब्र से निकालने का अनुरोध किया था ताकि परिवार उसी कब्रिस्तान में उसका अंतिम संस्कार कर सके।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि मौलिक अधिकारों का प्रयोग निरपेक्ष नहीं है लेकिन नैतिकता, स्वास्थ्य और लोक व्यवस्था को कायम रखा जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमामय जीवन का अधिकार न केवल किसी जीवित व्यक्ति को बल्कि ‘मृत’ को भी प्राप्त है।
न्यायालय ने आगे कहा, ‘हर व्यक्ति और हर धर्म के धार्मिक अधिकार, हालांकि, लोक व्यवस्था के अधीन हैं, जिसे बनाए रखना समाज के व्यापक हित में सर्वोपरि है। इन दोनों मौलिक अधिकारों को स्पष्ट रूप से ‘लोक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन’ बनाया गया है।’’
भाषा
अविनाश प्रशांत
प्रशांत

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