गणतंत्र दिवस: विभिन्न राज्यों में नेताओं ने संवैधानिक मूल्यों को कायम रखने का आह्वान किया

गणतंत्र दिवस: विभिन्न राज्यों में नेताओं ने संवैधानिक मूल्यों को कायम रखने का आह्वान किया

गणतंत्र दिवस: विभिन्न राज्यों में नेताओं ने संवैधानिक मूल्यों को कायम रखने का आह्वान किया
Modified Date: January 26, 2026 / 09:03 pm IST
Published Date: January 26, 2026 9:03 pm IST

नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) देश के अलग-अलग राज्यों में 77वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित परेड और कार्यक्रमों के दौरान राज्यपाल व मुख्यमंत्रियों सहित पार्टी इकाई के प्रमुखों ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और संवैधानिक मूल्यों को कायम रखने का आह्वान किया।

इन कार्यक्रमों में राज्य सरकारों की उपलब्धियों को सामने रखा गया, वहीं कुछ नेताओं ने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन में संवैधानिक संस्थाएं गंभीर खतरे में हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए आह्वान किया कि वे संविधान के आदर्शों से प्रेरित होकर एक ‘सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण हेतु संकल्पित हों।

उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘हम सभी का राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और विकास के प्रति समर्पण हमारे लोकतंत्र को सशक्त एवं मजबूत बनाता है। आइए, अपने अमर सेनानियों को स्मरण करने के साथ, संविधान के आदर्शों से प्रेरित होकर एक ‘सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण हेतु संकल्पित हों। जय हिंद!’’

योगी ने प्रदेश के युवाओं से विशेष रूप से आह्वान किया कि वे संविधान के आदर्शों को आत्मसात करते हुए नए उत्तर प्रदेश के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को कहा कि इस राज्य को आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है और उन्होंने मनरेगा और लंबित ग्रामीण विकास निधि को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मान ने कहा कि उनकी सरकार चंडीगढ़ को सिर्फ पंजाब की राजधानी बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।

मान ने कहा कि पंजाब देश का ‘‘अन्नदाता’’ कहा जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘देश की प्रगति के लिए हमने अपने प्राकृतिक संसाधनों की कीमत चुकाई। हमारा भूजल स्तर गिरा और हमारी नदियों का पानी भी प्रदूषित हुआ।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकतम बलिदान देने के बावजूद पंजाब के साथ लगातार अन्याय और मनमानी की गई है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री सैनी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा, “गणतंत्र दिवस संवैधानिक मूल्यों में हमारी अटूट आस्था, सामाजिक समानता के संकल्प और लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर मैं देश की स्वतंत्रता के लिए लड़ने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं को नमन करता हूं, जिन्होंने मजबूत गणराज्य की नींव रखी।”

उन्होंने कहा, “आइए, इस गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लें और राष्ट्रहित में एकजुट होकर कार्य करें।”

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि जम्मू कश्मीर में एक नए युग की शुरुआत हो गई है।

सिन्हा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जारी रहने और सिंधु जल संधि के स्थगित होने के साथ, भारत के जल संसाधनों का उपयोग अब उसकी अपनी आवश्यकताओं के लिए किया जाएगा।

सिन्हा ने यहां मौलाना आजाद स्टेडियम में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह को संबोधित करते हुए लोगों को आश्वासन दिया कि सरकार आतंकवाद से जुड़े हर मामले की गहन जांच करेगी और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समारोह के मुख्य अतिथि थे।

इस कार्यक्रम में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, जम्मू कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर और विपक्ष के नेता सुनील शर्मा समेत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सोमवार को कहा कि गणतंत्र दिवस को एकरूप भारत के बजाय एकजुट भारत के रूप में मनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश ऐसा होना चाहिए जहां संस्कृतियां एक-दूसरे को समृद्ध करें और भाषाएं गर्व के साथ सह-अस्तित्व में रहें।

केंद्र की भाजपा सरकार पर परोक्ष निशाना साधते हुए स्टालिन ने कहा, “आइए, एकजुट भारत का उत्सव मनाएं, एकरूप भारत का नहीं।”

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि भारत की पहचान उसकी “अनेक आवाज़ों” और विविध पहचानों से बनी है। उन्होंने कहा, “भारत तब आगे बढ़ता है जब हर नागरिक गरिमा, आत्मविश्वास और स्वतंत्रता के साथ जीवन जी सके।”

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने सोमवार को संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता छीनकर संविधान को अप्रासंगिक बनाने के ‘षड्यंत्र’ के प्रति आगाह किया।

सिद्धरमैया ने कहा, “संविधान का विरोध करने वाले सामाजिक परिवर्तन और सामाजिक न्याय के विरोधी हैं। लोगों को यह समझना चाहिए कि वे उन कानूनों और कार्यक्रमों का विरोध कर रहे हैं जो गरीबों, किसानों, श्रमिकों, दलितों और शोषितों के हित में हैं।”

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा कि संविधान की भावना और लोकतांत्रिक मूल्यों को अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने धर्मनिरपेक्षता और संघवाद की रक्षा के लिए एकता का आह्वान किया। वामपंथी नेता ने कहा, “शक्तिशाली केंद्र और सशक्त राज्यों की संघीय अवधारणा गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। हमें उन नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए जिनका उद्देश्य राज्यों की वित्तीय शक्तियों को कम करके और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक उपकरण बनाकर संघवाद को कमजोर करना है।”

कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर सोमवार को 77वे गणतंत्र दिवस की परेड आयोजित की गई, जिसमें सशस्त्र बलों ने देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए अपनी शक्ति और संकल्प का भव्य प्रदर्शन किया।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने परेड की सलामी ली। भारतीय सेना की अग्रिम पंक्ति की पैदल सेना और तोपखाना इकाइयों के मार्चिंग दस्तों के साथ-साथ भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना और सैन्य बैंड के दलों ने पेशेवर दक्षता, एकजुटता, गर्व और आपसी निष्ठा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी और राज्य मंत्रिमंडल के अन्य मंत्री समारोह में उपस्थित रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सैकड़ों लोगों ने इस भव्य परेड को देखा।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं और न्याय, स्वतंत्रता, समानता व बंधुत्व के मूल संवैधानिक मूल्यों के प्रति नयी प्रतिबद्धता का आह्वान किया।

साथ ही, उन्होंने गणतंत्र की रक्षा के लिए ‘‘सामूहिक सतर्कता’’ की आवश्यकता पर जोर दिया।

विविधतापूर्ण समाज में सद्भाव का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को ‘‘बहुलता, विविधता, समावेशिता और सामाजिक सद्भाव’’ की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने पोस्ट में कहा, ‘‘आज मुझे वह पुरानी कहावत याद आ रही है: स्वतंत्रता की कीमत निरंतर सतर्कता है। मैं आज सभी से इस सतर्कता का पालन करने का आग्रह करती हूं। हमारा गणतंत्र और हमारा संविधान आज हमारी सामूहिक सतर्कता की मांग करते हैं।’’

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने सोमवार को कहा कि लोगों के लिए सोचने और यह चयन करने का समय आ गया है कि वे ‘‘वोट बैंक की राजनीति’’ चाहते हैं या उनकी सरकार द्वारा पिछले पांच वर्ष में शुरू की गई विकास यात्रा को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री ने यहां गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद अपने संबोधन में कहा कि अगले कुछ महीनों में राज्य में चुनाव होंगे और लोगों को यह तय करना होगा कि वे ‘‘बांग्लादेशी मुसलमानों के सामने आत्मसमर्पण’’ करना चाहते हैं या प्रगति और विकास का हिस्सा बनना चाहते हैं।

बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता वर्ष 2030 तक एक करोड़ सरकारी नौकरियां और अन्य रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

राज्यपाल ने कहा कि सरकार राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि राज्य अपनी प्राकृतिक और खनिज संपदा, युवा शक्ति और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बल पर 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने सोमवार को गणतंत्र दिवस के अवसर पर भुवनेश्वर के महात्मा गांधी मार्ग पर और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कटक में राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह अवसर एक विकसित भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प को नई ऊर्जा और उत्साह प्रदान करे।’’

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को कहा कि माओवादी हिंसक विचारधारा देश के लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन इसे समाप्त करने का बेहद कठिन लक्ष्य अब पूरा होने जा रहा है।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री साय ने कहा, ‘‘माओवादी हिंसक विचारधारा देश के लोकतंत्र के लिए बड़ी चुनौती है। इनकी आस्था संविधान में नहीं है, न ही राष्ट्र की अस्मिता तथा इसके प्रतीक चिन्हों में है। इस कैंसर की तरह व्याधि का उपाय यही है कि इसे जड़ से नष्ट किया जाए।”

साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने माओवाद के खिलाफ सुनियोजित रणनीति अपनाई है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे जवानों ने रात-दिन कठिन मौसम और दुर्गम परिस्थितियों में हर पल खतरे का सामना करते हुए क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाया और अपने साहस तथा शौर्य से हर लक्ष्य को प्राप्त किया। माओवादी हिंसा को समाप्त करने का यह बेहद कठिन लक्ष्य अब पूरा होने को है। इसी साल के मार्च महीने तक हम माओवाद को इस सुंदर धरती से जड़ से मुक्त कर देंगे।”

महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने सोमवार को कहा कि यह राज्य प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने में लगातार अग्रणी रहा है और वैश्विक निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद स्थल के रूप में उभरा है।

गणतंत्र दिवस पर अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि महाराष्ट्र ने एक हजार अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का स्पष्ट और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है और यह देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहा है।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र के लिए बजट बढ़ाकर 27,000 करोड़ रुपये किए जाने का उल्लेख करते हुए सोमवार को कहा कि राज्य में 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में मनाया जाएगा।

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत- विकसित राजस्थान’ बनाने में सभी से सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस ‘‘हमें हमारे संविधान की महान परंपरा, उसके मूल तत्व और उसके आदर्शों में अटूट आस्था व्यक्त करने का अवसर है।’’

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अमर जवान ज्योति पर पुष्पांजलि अर्पित करके राष्ट्र के लिए प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

शहर की बड़ी चौपड़ पर तिरंगा फहराने के बाद समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और शीघ्र ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि राजस्थान में ‘डबल इंजन’ की सरकार पानी, बिजली, सड़क व अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विकास कर रही है।

वहीं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी बड़ी चौपड़ पर पार्टी की ओर से आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में भारत को ‘‘महान व खूबसूरत गणतंत्र’’ बताया जिसमें सभी जाति व संप्रदाय के लोगों को समानता का अधिकार प्राप्त है।

हालांकि, उन्होंने सत्ताधारी भाजपा पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोग संविधान को कमजोर कर रहे हैं।

जूली ने कहा, ‘‘जो लोग संविधान की वजह से सत्ता में आए हैं, वही आज संविधान को कमजोर करने की बात कर रहे हैं।”

भाषा जितेंद्र नेत्रपाल

नेत्रपाल


लेखक के बारे में