कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही: मलबे से 13 लोगों को निकाला गया, बचाव अभियान जारी
कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत ढही: मलबे से 13 लोगों को निकाला गया, बचाव अभियान जारी
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 24 जून (भाषा) पश्चिम कोलकाता के तारातला इलाके में बुधवार दोपहर तीन मंजिला निर्माणाधीन गोदाम की छत ढह जाने से उसके मलबे के नीचे कई लोग दबे गये। पुलिस ने यह जानकारी दी।
कोलकाता पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि अब तक 13 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है। यह गोदाम शहर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह की पट्टे पर ली गई जमीन पर बनाया जा रहा था।
मलबे से निकाले गए 10 लोगों को सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के ट्रॉमा केयर सेंटर में भर्ती कराया गया। अस्पताल के पदाधिकारियों ने बताया कि इनमें से चार की हालत गंभीर है।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘तारातला इलाके में ब्रेस पुल के निकट ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर इस गोदाम की छत दोपहर के करीब गिर गई। हमारे अधिकारी मौके पर हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस घटना के समय कुछ लोग वहां काम कर रहे थे। हमे कुछ और लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है।’’
घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान लोहे के बीम और कंक्रीट के बड़े-बड़े हिस्से ढह गए, जहां कई मज़दूर काम कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुतबिक उन्होंने मलबे के नीचे फंसे लोगों को मदद के लिए चिल्लाते हुए सुना।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, ‘‘भूतल पर पर निर्माण कार्य चल रहा था, जबकि पहली और दूसरी मंज़िल का आरसीसी ढांचा पूरा हो चुका था। अचानक पूरा ढांचा ढह गया।”
अग्निशमन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक,ढलाई के दौरान तीन मंज़िला गोदाम की छत ढह गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गोदाम के निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था।
अधिकारियों ने बताया कि कोलकाता पुलिस, आपदा प्रबंधन समूह, नागरिक सुरक्षा और अग्निशमन एवं आपात सेवा की टीम घटनास्थल पर बचाव कार्य में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि सेना के अधिकारी भी बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं जबकि गिर चुके लोहे के बीम को हटाने के लिए क्रेन और मशीनों को लगाया गया है।
अधिकारियों के अनुसार लोहे और कंक्रीट को काटने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा किया गया तथा बचावकर्मी ‘वर्टिकल ड्रिलिंग’ के ज़रिए मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ की टीम मलबे के नीचे फंसे लोगों का पता लगाने के लिए खोजी कुत्तों और ड्रोन की मदद ले रही है।
कोलकाता पुलिस के आपदा प्रबंधन दल के एक सदस्य ने कहा, ‘‘हम मलबे के नीचे से आ रही मदद की पुकार को सुन वहां तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही, हम दबे हुए लोगों को भरोसा दिला रहे हैं कि उन्हें जल्द ही बचा लिया जाएगा।”
इस घटना के बाद, राज्य सचिवालय में आपदा प्रबंधन समूह का नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है।
कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इलाके में कुछ समय से बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कार्य किए जा रहे थे।
मंत्री इंद्रनील खान ने कहा, “हम निश्चित रूप से दुर्घटना के कारणों और किसी भी तरह की अनियमितता की जांच करेंगे। लेकिन अभी प्राथमिकता ज्यादा से ज्यादा पीड़ितों को बचाने की है।”
घटनास्थल पर मौजूद कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक शुरुआती जांच में इमारत की डिज़ाइन और निर्माण में खामियों के सबूत मिले हैं, जिनकी वजह से यह हादसा हो सकता है।
मौके पर मौजूद एक सिविल इंजीनियर ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि ऊपर बने कंक्रीट का वजन संभालने के लिए लोहे की बीम मज़बूत नहीं थीं। साथ ही, मुझे कोई ब्रेस भी नहीं दिख रहे हैं, जिनकी ज़रूरत आरसीसी ढलाई को सहारा देने के लिए होती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह देखना होगा कि क्या ढांचे के डिजाइन को नगर निकाय से मंजूरी मिली थी और अगर मिली थी तो क्या निर्माण उसी के अनुरूप हो रहा था।’’
पश्चिम बंगाल की शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल और कोलकाता नगर निगम की आयुक्त स्मिता पांडे भी घटनास्थल पर पहुंचीं। कोलकाता पुलिस के आयुक्त अजय नंद घटनास्थल पर बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।
घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता राकेश सिंह ने आशंका जताई थी कि कई पीड़ितों की मौत बचाव कार्य शुरू होने से पहले ही चोटों के कारण हो गई होगी।
भाषा धीरज प्रशांत
प्रशांत

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