‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत झारखंड में 1900 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे : मनोहर लाल

‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत झारखंड में 1900 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे : मनोहर लाल

‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत झारखंड में 1900 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे : मनोहर लाल
Modified Date: June 19, 2026 / 11:17 pm IST
Published Date: June 19, 2026 11:17 pm IST

रांची, 19 जून (भाषा) केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को कहा कि ‘अर्बन चैलेंज फंड’ (यूसीएफ) के तहत अगले चार वर्षों में झारखंड में लगभग 1,900 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य जन सुविधाओं में सुधार करना, शहरों को आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने इस योजना के तहत राज्य सरकार से 7,600 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के प्रस्ताव भी मांगे हैं।

केंद्रीय मंत्री ने यहाँ आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘केंद्र सरकार ने बजट में एक लाख करोड़ रुपये की कुल सहायता के साथ यूसीएफ की घोषणा की थी। इस राशि का तीन गुना हिस्सा बाहरी स्रोतों से आएगा— जिसमें एक लाख करोड़ रुपये राज्यों से और दो लाख करोड़ रुपये वित्तीय संस्थानों से जुटाए जाएंगे— ताकि देश भर में कुल चार लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं तैयार की जा सकें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस फॉर्मूले के आधार पर झारखंड का हिस्सा 1,900 करोड़ रुपये बनता है। राज्य सरकार द्वारा इस राशि से चार गुना अधिक यानी 7,600 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के प्रस्ताव राष्ट्रीय स्तर की शीर्ष (अपेक्स) समिति के पास विचार के लिए भेजे जाएंगे।’’

मंत्री ने बताया कि यह समिति शहरी बुनियादी ढांचे में सुधार, शहरों को आर्थिक केंद्रों में बदलने और जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए इन प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगी।

मनोहर लाल ने कहा कि इस योजना के दायरे में लगभग 80 श्रेणियों की परियोजनाएं शामिल हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य अपनी जरूरत के हिसाब से उपयुक्त परियोजनाओं का चयन करेंगे, जिन्हें बाद में मंजूरी दी जाएगी। अगले छह महीने के भीतर इन परियोजनाओं के चयन और ‘विस्तृत परियोजना रिपोर्ट’ (डीपीआर) तैयार करने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद अगले चार वर्षों में इस फंड का उपयोग किया जाएगा।’’

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल राज्य के अधिकारियों के साथ शहरी विकास और ऊर्जा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर व्यापक चर्चा करने के लिए रांची आए थे।

भाषा दिलीप अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में