मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के साथ 300 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश

मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के साथ 300 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश

मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के साथ 300 करोड़ रुपये के अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश
Modified Date: April 5, 2026 / 07:47 pm IST
Published Date: April 5, 2026 7:47 pm IST

नयी दिल्ली, पांच अप्रैल (भाषा) दिल्ली पुलिस ने एक कथित मास्टरमांइड एवं 10 अन्य को गिरफ्तार करके 300 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी से जुड़ी 2000 से अधिक शिकायतों के सिलसिले में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

उसने बताया कि पुलिस ने कई राज्यों में सक्रिय एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया जिसके संबंध विशेष रूप से कंबोडिया में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी गिरोहों से थे।

पुलिस ने कहा, ‘‘ हमने अब तक 100 से अधिक फर्जी कंपनियों से जुड़े 260 से अधिक बैंक खातों की पहचान की है जिनका इस्तेमाल अपराधिक कमाई को अंतरित करने के लिए किया जाता था। इस गिरोह से संबंधित शिकायतों की कुल संख्या 2,567 है।’’

पुलिस उपायुक्त (डीसीपी-अपराध शाखा) आदित्य गौतम ने बताया कि मुख्य आरोपी करण कजारिया को उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी होने के बाद तीन अप्रैल को कोलकाता हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया तथा उसे आगे की जांच के लिए एक दिन बाद दिल्ली लाया गया ।

यह मामला शहर के निवासी सुल्तान की शिकायत के बाद सामने आया, जिसने आरोप लगाया कि एक निवेश योजना में फंसाकर उससे 31.45 लाख रुपये ठग लिये गये।

पुलिस ने बताया कि पीड़ित को ऊंचे मुनाफे का वादा करके एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन डाउनलोड करने और उसमें पैसा लगाने के लिए राजी किया गया था लेकिन जब उसने मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो एप्लिकेशन ने काम करना बंद कर दिया और ग्रुप तक पहुंच असंभव हो गई।

अधिकारी ने बताया, ‘‘उत्तरपूर्व के साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी और बाद में विस्तृत जांच के लिए इसे अपराध शाखा को सौंप दिया गया।’’

पुलिस ने बताया कि इस गिरोह ने पीड़ितों को लुभाने के लिए फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ग्रुप बनाए और बिचौलियों के माध्यम से जुटाये गये ‘म्यूल’ (फर्जी) बैंक खातों का इस्तेमाल किया।

पुलिस का कहना है कि ठगों ने ओटीपी समेत संवेदनशील बैंकिंग विवरण हासिल करने के लिए फर्जी एप्लिकेशन की मदद ली। पुलिस ने बताया कि पीड़ितों से ठगी गई धनराशि को बैंक खातों और फर्जी कंपनियों के एक जटिल जाल के माध्यम से इधर से ऊधर भेजा गया ताकि इसका पता न चल सके।

डीसीपी ने बताया, ‘‘ मुख्य समन्वयक समझा जा रहा कजारिया विदेशी संचालकों के साथ सीधे संपर्क बनाए रखता था और क्रिप्टोकरेंसी चैनलों के माध्यम से धन के अंतरण में मदद करता था।’’

डीसीपी ने बताया कि वह भारतीय संचालकों और अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों के बीच सेतु का काम करता था। उन्होंने कहा कि कजारिया फर्जी बैंक खाते बनवाने और एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से संवेदनशील बैंकिंग विवरण साझा करने में भी शामिल था।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ के दौरान उसने कथित तौर पर इस गिरोह में अपनी संलिप्तता स्वीकार की।

डीसीपी ने बताया कि उसके नेटवर्क से जुड़े खाते राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज 2,500 से अधिक शिकायतों और 300 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी से संबंधित थे।

जांच से पता चला कि यह गिरोह पिछले चार से पांच वर्षों से सक्रिय था और कई राज्यों में बड़े पैमाने पर काम कर रहा था।

भाषा

राजकुमार नरेश

नरेश


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