शबरिमला, 20 जनवरी (भाषा) शबरिमला मंदिर में करीब दो महीने की मंडला-मकरविलक्कू तीर्थयात्रा संपन्न होने के बाद मंदिर के कपाट मंगलवार सुबह बंद कर दिए गए।
पंडालम शाही परिवार के प्रतिनिधि, पुनार्थम नल नारायण वर्मा द्वारा दर्शन करने के बाद मंदिर के कपाट सुबह छह बजकर 45 मिनट पर बंद कर दिए गए।
त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के अधिकारियों के अनुसार, अंतिम अनुष्ठान के लिए मंदिर का कपाट सुबह पांच बजे खोला गया था।
परंपरागत अनुष्ठानों के बाद पूर्वी मंडपम में गणपति होम का आयोजन किया गया। इसके बाद, तिरुवाभरणम् की वापसी यात्रा पंडालम श्रंबिक्कल पैलेस की ओर रवाना हुई।
टीडीबी के अधिकारियों ने कहा, ‘‘पेरियास्वामी मरुथुवाना शिवनकुट्टी के नेतृत्व में 30 सदस्यीय दल पवित्र आभूषणों को उसी मार्ग से ले जा रहा है जिससे वे आए थे। उनके 23 जनवरी को पंडालम पहुंचने की उम्मीद है।’’
मुख्य पुजारी (मेलशांति) ई. डी. प्रसाद नम्बूदरी ने भगवान अयप्पा की मूर्ति पर विभूति अभिषेकम किया।
मूर्ति को रुद्राक्ष की माला पहनाई और उसके हाथ में योग दंड रखा गया।
पवित्र हरिवरसनम पाठ के बाद मंदिर के दीप बुझा दिए गए और गर्भगृह को बंद कर दिया गया।
इसके बाद मंदिर की चाबियां पंडालम के राजपरिवार शाही परिवार के प्रतिनिधि को सौंप दी गईं।
बाद में पवित्र 18 सीढ़ियां उतरने और पारंपरिक अनुष्ठान करने के बाद, शाही परिवार के प्रतिनिधि ने चाबियां देवस्वओम के कार्यकारी अधिकारी ओ. जी. बीजू और मेलशांति की उपस्थिति में शबरिमला के प्रशासनिक अधिकारी एस. श्रीनिवासन को सौंप दीं।
टीडीबी के अधिकारियों ने कहा, ‘‘मासिक पूजा के खर्चों के लिए रखी गई पैसों की थैली भी परंपरा के अनुसार सौंप दी गई।’’
शाही प्रतिनिधि के पंडालम महल के लिए रवाना होने के साथ ही तीर्थयात्रा आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गई।
टीडीबी के अधिकारियों ने कहा कि श्रद्धालुओं, पुलिस और विभिन्न सरकारी विभागों के सहयोग से यह आयोजन सुचारू रूप से संपन्न हुआ।
भाषा यासिर अमित
अमित