swami avimukteshwaranand/ image source: AjayFaujisp x handle
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश सरकार और ज्योतिष्पीठ से जुड़े Shankaracharya Avimukteshwaranand के बीच विवाद अब सार्वजनिक हो गया है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक औपचारिक नोटिस जारी किया है, जिसमें उनके द्वारा स्वयं को “शंकराचार्य” घोषित करने पर आपत्ति जताई गई है। यह नोटिस माघ मेला क्षेत्र में उनके शिविर के बोर्ड पर इस शब्द का प्रयोग किए जाने को लेकर भेजा गया है। प्रशासन ने इसे सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना की श्रेणी में रखा है।
माघ मेला प्रयागराज में आयोजित होने वाला देश का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु, संत और धर्माचार्य शामिल होते हैं। इसी मेला क्षेत्र में स्वामी Avimukteshwaranand का शिविर स्थापित है। मेला प्राधिकरण ने नोटिस में बताया कि शिविर के बाहर लगाए गए बोर्ड में उन्हें “ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य” के रूप में दर्शाया गया है। प्रशासन का कहना है कि शंकराचार्य पद से संबंधित मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में किसी व्यक्ति द्वारा स्वयं को शंकराचार्य घोषित करना न्यायालय की प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जा सकता है।
UP सरकार अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ खुलकर आ गई है। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य पद पर सवाल उठाते हुए उन्हें नोटिस भेजा है।
नोटिस में लिखा है– “शंकराचार्य पद का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जब तक SC से कोई आदेश नहीं… pic.twitter.com/ECoJjaLsLD
— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) January 20, 2026
Shankaracharya Avimukteshwaranand को जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि “शंकराचार्य पद का मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जब तक इस विषय में कोई स्पष्ट आदेश पारित नहीं होता, तब तक धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में किसी भी व्यक्ति का पट्टाभिषेक अथवा सार्वजनिक घोषणा नहीं की जा सकती। इसके बावजूद माघ मेला शिविर के बोर्ड में आपने स्वयं को शंकराचार्य घोषित कर रखा है, जो माननीय सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना है।”
मेला प्राधिकरण ने Shankaracharya Avimukteshwaranand को 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि ‘शंकराचार्य’ शब्द का प्रयोग किस आधार पर किया जा रहा है। नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि समय सीमा के भीतर संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है और मेला क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है।
वहीं, दूसरी ओर Shankaracharya Avimukteshwaranand सरस्वी ने शासन द्वारा मिले हुए नोटिस का जवाब दिया है स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अब शासन-प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति तय करेगा कि शंकराचार्य कौन है। राष्ट्रपति को भी शंकराचार्य तय करने का अधिकार नहीं है।
शंकराचार्य पद को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा है। ज्योतिष्पीठ शंकराचार्य पद पर वैधानिक मान्यता, उत्तराधिकार और नियुक्ति को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति द्वारा आधिकारिक रूप से खुद को शंकराचार्य घोषित करना न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप माना जाता है।
ये प्रशासन तय करेगा कि शंकराचार्य कौन है?
ये यूपी का मुख्यमंत्री तय करेगा कि शंकराचार्य कौन है?
हम निर्विवाद रूप से शंकराचार्य हैं।
– शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद pic.twitter.com/TOfpGuAXYp
— Lutyens Media (@LutyensMediaIN) January 20, 2026