विद्युत भार आधारित बिल को लेकर विरोध, सावंत ने स्मार्ट मीटर लगाने का काम रोका
विद्युत भार आधारित बिल को लेकर विरोध, सावंत ने स्मार्ट मीटर लगाने का काम रोका
पणजी, 13 जून (भाषा) गोवा सरकार ने जनता के विरोध के बाद बिजली विभाग को स्मार्ट मीटर लगाने और विद्युत भार से जुड़े जुर्माने की वसूली पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
विपक्षी कांग्रेस ने कहा कि इस कदम से पूरी प्रक्रिया की खामियां उजागर हो गई हैं।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने शुक्रवार शाम निर्देश जारी किए।
उन्होंने घोषणा की कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया और बढ़े हुए बिजली बिल पर लगाए जा रहे जुर्माने की वसूली को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
सावंत ने उपभोक्ताओं को सलाह दी कि मीटर, स्वीकृत विद्युत भार और बिजली खपत का विस्तृत सत्यापन पूरा होने तक वे विवादित बिजली बिल का भुगतान न करें।
विपक्षी कांग्रेस ने शनिवार को स्मार्ट बिजली मीटर लगाने और जुर्माने के मुद्दे पर सरकार को घेरा।
पार्टी ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया ‘‘उपभोक्ता विरोधी’’ है और इसमें प्रशासनिक विफलता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
गोवा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जीपीसीसी) के अध्यक्ष गिरीश चोडणकर ने कहा कि सरकार के इस फैसले ने पूरी प्रक्रिया की खामियों को उजागर कर दिया है।
उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘इस पूरे घटनाक्रम ने एक बुनियादी सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकार जनता की सेवा के लिए है या जनता सरकार की सेवा करने के लिए है?’’
चोडणकर ने कहा कि यदि बिजली विभाग ने ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान कर ली थी, जिनका स्वीकृत विद्युत भार अपर्याप्त था, तो उसे पहले ही उनसे संपर्क करना चाहिए था और पारदर्शी तथा उपभोक्ता-अनुकूल व्यवस्था के जरिए आवश्यक संशोधन की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए थी।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के पास प्रत्येक उपभोक्ता का पता, मोबाइल नंबर और बिल संबंधी रिकॉर्ड उपलब्ध है। फिर व्यक्तिगत नोटिस क्यों नहीं जारी किए गए? कथित अनुपालन न करने के लिए पूरा बोझ आम नागरिकों पर क्यों डाला गया और उन पर जुर्माना क्यों लगाया गया?’’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस तरह का रवैया उपभोक्ताओं के प्रति ‘‘प्रशासनिक विफलता और असंवेदनशीलता’’ को दर्शाता है।
कांग्रेस नेता ने इस पूरी कवायद के पीछे की मंशा पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इसका उद्देश्य वास्तव में बिजली सेवाओं में सुधार करना था या फिर केवल अतिरिक्त राजस्व जुटाना।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब सरकार प्रचार अभियानों, विभिन्न आयोजनों और अपनी छवि निर्माण पर भारी खर्च कर रही है, लोगों को यह पूछने का पूरा अधिकार है कि क्या ये जुर्माने उपभोक्ताओं की कीमत पर सरकारी खजाना भरने के लिए लगाए गए थे।’’
चोडणकर ने आरोप लगाया कि सरकार को इस मुद्दे पर उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का प्रयास किया गया।
इस बीच, आम आदमी पार्टी (आप) ने शनिवार को बिजली बिल में कथित बढ़ोतरी और उपभोक्ताओं पर लगाए गए जुर्माने के विरोध में राज्य के बिजली मंत्री सुदिन धवलीकर के आवास के बाहर प्रदर्शन किया।
पार्टी की गोवा इकाई के अध्यक्ष वाल्मीकि नाइक ने आरोप लगाया कि सरकार जुर्माना लगाकर, बढ़े हुए बिजली बिल जारी कर और स्मार्ट मीटर लगाकर बिजली विभाग का इस्तेमाल ‘‘वसूली के माध्यम’’ के रूप में कर रही है।
उन्होंने उपभोक्ताओं पर लगाए गए जुर्माने को तत्काल वापस लेने की मांग की।
भाषा
राखी नेत्रपाल
नेत्रपाल

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